आन्तरिक विवाद के कारण प्रधानमन्त्री ओली संकट में, सरकार विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव की संभावना
काठमांडू, २७ फरवरी । नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) में आन्तरिक विवाद तीव्र हो गया है, शीर्ष नेता स्पष्ट रुप में दो समूह में विभाजित हो गए हैं । जिसके चलते प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली ने आन्तरिक रुप में अल्पमत में पड़ गए हैं और अनुमान किया जा रहा है कि यह शिलशिला जारी रहेगा तो सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पंजीकृत होने की संभावना है ।
विशेषतः पार्टी उपाध्यक्ष वामदेव गौतम को राष्ट्रीयसभा सदस्य बनाकर सम्भावित प्रधानमन्त्री के उम्मीदवार के रुप में आगे लाने के लिए क्रियाशील समूह के कारण प्रधानमन्त्री ओली पार्टी की राजनीति में संकट में पड़ गए हैं । पिछली बार उपाध्यक्ष गौतम को राष्ट्रीयसभा सदस्य बनाना है या नहीं ? इसी विषय को लेकर नेकपा स्थायी कमिटी सदस्य तथा सचिवालय सदस्य विभाजित हो गए हैं ।
बुधबार सम्पन्न सचिवालय बैठक ने उपाध्यक्ष गौतम को राष्ट्रीयसभा सदस्य बनाने का निर्णय किया था । लेकिन उसके कुछ ही घंटों के बाद प्रधानमन्त्री ओली ने पूर्व प्रधानमन्त्री एवं पार्टी के वरिष्ठ नेता माधव कुमार नेपाल को बुलाकर कहा कि गौतम को राष्ट्रीयसभा सदस्य नहीं बनाया जाएगा । प्रधानमन्त्री ओली निकट स्रोत कहता है कि गौतम को राष्ट्रीयसभा सदस्य बनाने के लिए आन्तरिक व्यापारिक घराना और विदेशी शक्ति भी परिचालित हैं, वही शक्ति गौतम को सिर्फ राष्ट्रीयसभा सदस्य ही नहीं, संविधान संशोधन कर प्रधानमन्त्री के उम्मीदवार भी बनाना चाहता है ।
राजनीतिक वृत्त में यह भी अनुमान है कि प्रधानमन्त्री ओली गौतम को नहीं, अर्थमन्त्री डा. युवराज खतिवडा को ही पुनः राष्ट्रीयसभा सदस्य बनाना चाहते हैं । अनुमान के अनुसार अगर डा. खतिवडा ही राष्ट्रीयसभा सदस्य बन जाते हैं तो नेकपा के अन्दर तीव्र असंतुष्टि बढ़ जाएगी । सचिवालय के बहुमत सदस्य की राय को इन्कार करने का आरोप प्रधानमन्त्री के ऊपर लगनेवाला है ।
स्मरणीय है नेकपा में ९ सदस्यीय सचिवालय है । सविचालय के कूल सदस्यों में से वर्तमान अवस्था में ओली के पक्ष में सिर्फ ३ सदस्य हैं । पूर्व प्रधानमन्त्री एवं वरिष्ठ नेता झलनाथ खनाल तो यहां तक कह चुकें हैं कि प्रधानमन्त्री होकर ओली जी क्यों पार्टी निर्णय को इन्कार कर रहे हैं । इसतरह का असंतुष्टि नेकपा के अन्दर विभाजन पैदा कर रही है, जो अन्ततः सरकार विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव तक जाने की संवभाना है । दो वर्षीय कार्यकाल पूरा करने के कारण अब संवैधानिक रुप में भी ओली सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव किया जा सकता है । राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल को हरदम अस्थित सरकार और राजनीति में रखकर फायदा लेनेवाला शक्ति अब क्रियाशील हो चुकी है ।

