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श्रीलंका की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बर्खास्त

 

कोलंबो। श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने विशेषाधिकार का प्रयोग कर देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश शिरानी भंडारनायके को बर्खास्त कर दिया है।
श्रीलंका की संसद ने गत शुक्रवार को 54 वर्षीय भंडारनायके के खिलाफ महाभियोग चलाने के पक्ष में पेश प्रस्ताव को भारी बहुमत से पास कर दिया था। गौरतलब है कि भंडारनायके को भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने के बाद, उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट की ओर से प्रवर समिति को गैर कानूनी ठहराने के बाद संसद में लाया गया था। भंडारनायके के खिलाफ महाभियोग चलाए जाने के फैसले का वकीलों ने काफी विरोध किया था।

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अधिकारियों के हवाले से मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘रविवार को भंडारनायके के पास पद छोड़ने से संबंधित नोटिस भेजा गया।’ उनके खिलाफ महाभियोग चलाए जाने को पहले सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया था और एक संसदीय समिति द्वारा उन्हें भ्रष्टाचार का दोषी पाए जाने वाली रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। बार एसोसिएशन, मानवाधिकार समूह ने भंडारनायके के खिलाफ फैसले को स्थगित करने के लिए राजपक्षे से आग्रह करने का फैसला किया है।

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पिछले साल आठ दिसंबर को सत्तारूढ़ यूनाइटेड पीपुल्स फ्रीडम एलायंस के सांसदों की ओर से लाए महाभियोग में भंडारनायके के खिलाफ शामिल 14 में तीन आरोपों को संसदीय समिति ने सही पाया था। इन तीन मामलों में वित्तीय अनियमितता, संपत्ति की घोषणा नहीं करने और एक निवेशक कंपनी के प्रकरण में दिलचस्पी दिखाना शामिल है। पिछले साल छह दिसंबर को भंडारनायके ने अपने खिलाफ सभी आरोपों से इन्कार किया था। उन्होंने संसदीय समिति के सदस्यों पर मौखिक रूप से उनका अपमान किए जाने का आरोप लगाया है। संसद में भंडारनायके के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए पेश प्रस्ताव के पक्ष में 155 और विपक्ष में 49 मत पड़े थे।

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