लाशों पर लाशें बिछी, गली–गली विरान गांव, शहर, कस्बे सभी, लगते आज वुहान : रामनिवास मानव
दोहे
सन्दर्भ कोरोना
डॉ. रामनिवास ‘मानव’
गली–मुहल्ले चुप सभी, घर–दरवाजे बंद
कोरोना का भूत ही, घूम रहा स्वच्छन्द ।
लाशों पर लाशें बिछी, गली–गली विरान
गांव, शहर, कस्बे सभी, लगते आज वुहान ।
चीख–चीख कर अब कहे, कोबिड नाइन्टीन
दुश्मन बना मनुष्य का, विषधर ड्रेगन चीन ।
विष पिलाया चीन ने, भोग रहा संसार
विवश देखता विश्व है, लाशों का अम्बार ।
कर न पाये आज तक, जो बम, गोले तोप
पलक झपकते कर गया, कोरोना का कोप ।
उड़ती थी आकाश में जो आदम की जात
कोरोना ने दी बता, उसकी क्या औकात ।
जाति–धर्म की देश की, मिटी आज पहचान
कोरोना के सामने, एक सभी इन्सान ।
नेता, नायक, आमजन, सेना या सरकार
एक विषाणु के समक्ष, सब कितने लाचार ।
लेकिन इसके कोप से, होना मत भयभीत
दुनिया सारी समझ ले, भय के आगे जीत ।
देता आया विश्व को, भारत यह सन्देश ।
संस्कृति भारत की रही, सबके लिए विशेष ।
– नारनौल, भारत


