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मर्चवार :जितेन्द्र उर्फ ‘बब्लू शुक्ला’ ने जनता को किया जीवन समर्पण

 
 महेश गुप्ता, हिमालिनी संवादाता रूपन्देही| भैरहवा/ रुपन्देही जिल्ला के मर्चवार सम्मरीमाई गाँव पालिका के अध्यक्ष जितेन्द्र नाथ शुक्ला, पूर्व ग्राम प्रधान स्व. राजेन्द्र नाथ शुक्ला के सबसे छोटे बेटे हैं। जितेन्द्र के पिता स्व. राजेन्द्र, जो 35 वर्षों के लिए तत्कालीन असुरैना गाँव पंचायत के प्रधान पंच थे, मर्चवार के एक व्यक्ति थे, जो महामहिम राजा की तत्कालीन सरकार से गोरखा दक्षिण बाहु पदक से सम्मानित हुए थे।
पहली धर्म पत्नी के देहान्त के बाद दूसरी धर्म पत्नी से पैदा हुए जितेंन्द्र, मर्चवार के विकास के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं।
 भाई शैलेंन्द्र और वीरेंन्द्र, जो बडी मां से पैदा हुए थे, जिनकी राजनीति और समाज सेवा में कम रुचि थी, इसलिए जितेंन्द्र ने अपने पिता की उम्मीदों को पूरा करने के लिए लोगों की सेवा मे लगेहुए हैं।बडे भाई शैलेंन्द्र एक कार्यकाल के लिए ग्राम पंचायत के प्रधान पंच और एक कार्यकाल के लिए क्षेत्रिय सदस्य बने, जबकि बीरेंन्द्र मझंले भाई एक कार्यकाल के लिए ग्राम पंचायत के प्रधान पंच बने और समाज सेवा से दूर हो गए। उसके बाद, मैंने अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की, जितेन्द्र कहते हैं।
29 डिसेम्बर 1973 (बि. स. 2030 पौष 14 गते) के शुक्ला परिवार में पैदा हुए जितेन्द्र का कहना है कि यह उनके पिता की कर्म स्थंली थी¸ मैने भी अपना जीवनका सर्वस्व जीवन मर्चवार की जनताको सौप दिया।जितेंन्द्र कहते हैं, “भले ही मेरी मां मर्चवार में प्रसव पीड़ा से पीड़ित थीं, और मैं पैदा नहीं हुआ था। मेरे पिता जी माताजीको गोरखपुर लेगए और वहा अस्पताल मेरा जन्म हुआ।”मर्चवार की धूल में अपना बचपन बिताने वाले शुक्ला को आठ साल बाद उनके पिता ने गोरखपुर में भर्ती कराया था क्योंकि इलाके में कोई स्कूल या कॉलेज नहीं था। जितेन्द्र की मां का कहना है कि अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, जितेन्द्र ने गोरखपुर विश्वविद्यालय से बि.ए. की डिग्री पूरी की। और मर्चवार के जनता की सेवा करने मे लगे। जितेन्द्र के पड़ोसी 78 वर्ष के राम किशुन कुर्मी का कहना है कि शुक्ला दरवार के राजकुमार जितेन्द्र, जिनके परीवार के पास हजारों बीघा जमीन थी और हाथी¸ घोडे समेत सैकड़ों श्रमिक थे, इन्होने बचपन से ही धन और एसोआराम  और विलासिता पर ध्यान नहीं दिया है।अपने पिता की मृत्यु के बाद, जितेन्द्र की शादी गोरखपुर में हुई। शादी के बाद, उन्हें अपनी पत्नी पल्लवी शुक्ला द्वारा अपनी मां और मर्चवार लोगों द्वारा गोरखपुर में रहने के लिए मना लिया गया, लेकिन वह अपनी मातृभूमि नहीं छोड़ सके। इस कार्य मे उनकी पत्नी और बच्चोका पुरा त्याग कि भावना और पूर्ण सहयोग रहा है।उनके पड़ोसियों के अनुसार, जितेन्द्र ने अपनी पत्नी पल्लवी शुक्ला और दो बेटों अर्थव शुक्ला और हृदित शुक्ला को गोरखपुर पढने के लिये छोड़ दिया और मर्चवार में सामाजिक कार्य करने लगे। स्थानीय लोगों का कहना है, “भले ही उनकी पत्नी और बेटे समय-समय पर उनसे मिलते रहते हैं, लेकिन जितेन्द्र मर्चवार की जनता के लिए दिन रात आपनी खून पसीना बहते रहते हैं, जिससे वे लोगों के बीच अत्यन्त लोकप्रिय नेता बन गए हैं।” उनकी पत्नी से बात करने पर उनकी पत्नी ने बातया वह हामको और बच्चोको बहुत प्यार करते है। जब भी गोरखपुर आते है¸ उनके दिल मे मर्चवार की जनता बसी रहती है। उनकी पत्नी पल्वी शुक्लाका कहेना है की मेरे पति के इस तयाग¬ को देखते हुये मै और मेरे दोनो बेटो ने उनकी जन भावना की इक्षा देखते हुये उनका पुरा साथ देनेका प्रण लिया आज मुझको अपने पति पे गर्व है। मर्चवार के शुक्ला परिवार ने जितेन्द्र को निष्कासित कर दिया था, तब भी वो हार नही माने और जनता के लिए लगातार लडाई लडते रहे पुरे शुक्ला खानदान ने बब्लु शुक्ला के खीलाफ एक मजबुत और पुराना उम्मेद्वार खाडा कीया जो की शुक्ला खानदान का था और उसके बावजुद बब्लु शुक्ला ने जनताकी औकात देखाते हुये सबकी औकात ठिकाने लगाते हुवे रेकार्ड वोटो से विजयी हुए और तब से लगातार सामाजिक क्षेत्र में काम कर रहे हैं, तब से वे दलित बस्ती लगायत हर धर्मिक घरौँ मे उठते बैठते ‌और खाना खाते उनके हर सुख दु:ख मे शमील होते रहे है। जितेन्द्रको हमेशा लोगों द्वारा प्यार किया जाता रहा है, भले ही वह अपने ही पट्टीदारो द्वारा निष्कासित कर दिए गए हो। वह कहते हैं, “अपने ही भाई शैलेन्द्र की मौत के बाद भी, शुक्ला परिवार ने उन्हें परिवार में प्रवेश करने से रोककर दूर रखने की कोशिश की, लेकिन जनता ने हमेशा साबित किया है कि मैं मर्चवार की भूमि का बेटा हूं।” स्थानीय निकाय के चुनावों में, नेपाल गणराज्य की नई संरचना के अनुसार, जितेन्द्र ने लोगों की इच्छा के अनुसार अपनी उम्मीद्वारी नामित किया और सम्मानजनक वोटों के साथ सम्मरीमाई गावँपालिका से अध्यक्ष पद जीते। इस गाँवपालिका की आवादी लगभग 52 हजार की है। पत्नी¸ बच्चो¸ मित्रो की अथक परिश्रम एवं जनता के प्यार ने उनकी चुनावो मे जीत दिलवाई है। यह जीत मर्चवार के लोगों की जीत है यह शुक्ला की सोच है। यहां के लोगों की भावनाओं को समझने के लिए मैंने बहुत परिश्रम है¸ शुक्ला कहते हैं, “मैंने मार्चवर के सैकडौ लोगों को अपना रक्त दिया हु, जिन्हें रक्त की आवश्यकता थी।” गोरखपुर आनेवाले लोगो को मैने आपनी पुरी तकत से स्वास्थय सुविधा उपलब्ध करवाया।  स्थानीय जैस मोहम्मद खान के अनुसार, जितेन्द्र, जो अपनी जीत के दिन से मर्चवार के समग्र विकास पर काम कर रहे हैं, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल और कृषि को प्राथमिकता दीया है।
नॉवेल कोराना वायरस (कोविद-19) के कारण दुनिया इस समय दहशत की स्थिति में है। ऐसा लगता है कि नेपाल पर भी इसका सीधा असर पड़ा है। यह मर्चवार में और भी अधिक संवेदनशील है, जो भारत की सीमाओं को पार करता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, शुक्ला ने अपनी कार्यकारी टीम और सभी जनप्रतिनिधियों के साथ इस खतरे से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर काम किया है लगातार खुद ही माइकिंग कर के जनताको जागरुक कर रहे है यह एक बहुत बढी बात है करोना बिरुद्ध लडाइ पुरे देश मे आपनी जान जोखिम मे डालके लड रहे है।स्थानीय मीडिया के एक व्यक्ति असलम खान ने कहा कि उन्होंने जागरूकता फैलाने और गरीबों, दुखी और निराश्रितों को राहत देने के लिए दिन-रात ग्रामीणों तक पहुंचने में देरी नहीं की।मुझे लगता है कि वह नेपाल में स्थानीय सरकारों के बीच सबसे अच्छा काम कर रहा है। स्थानीय मीडिया के एक व्यक्ति खान ने कहा, “खुद दिन-रात लोगों की मद्द कर रहे हैं।” अध्यक्ष जितेन्द्र शुक्ला ने भी कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए सम्मरीमाई के आपदा प्रबंधन कोष में 50,000/- (पचास हजार) रुपये का योगदान दिए है।वह कहते हैं कि कभी-कभी जितेन्द्र बहुत काम के वजह से परेसन होजाते हैं। वह कहते है, ‘मैंने सब कुछ छोड़ दिया है और मर्चवार के लोगों के लिए जीवन समर्पीत कर दिया है। लेकिन इससे दु:ख होता है जब कुछ लोग समाज सेवा में राजनीति को मिलाने की कोशिश करते हैं। ’जितेन्द्र ने कहा कि मेरे दो बेटे और पत्नी गोरखपुर में कोरोना के लकडाउन के कारण फंस गए हैं। और मैं मर्चवार की धरती पर लड़ रहा हूं।’इसके कारण मर्चवार के गांवों को लकडाउन में भी नॉवेल कोराना वायरस से सुरक्षित बनाने के लिए समन्वय किया जा रहा है ।यही उनकी समझ है।गावँ पालिका के अध्यक्ष बन्ने के बाद जितेन्द्र के “हीरो ऑफ द पब्लिक अरवाड 2076” से सम्मानित किया गया है। नेपाल सेना द्वारा प्रदान की जाने वाली सर्जरी सहित “नि: शुल्क व्यापक संयुक्त स्वास्थ्य शिविर” में उनकी सहायता के लिए नेपाल सेना के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के कार्यालय बुटवल को उमाकांत झा, प्रदेश नंबर 5 के वर्तमान प्रमुख से सराहना का पत्र मिला है।प्रहरी दिवस वि.स. 2076 पर सामुदायिक पुलिस भागीदारी कार्यक्रम में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें वर्तमान पुलिस महानिरीक्षक सर्बेंद्रनाथ खनाल द्वारा प्रशंसा पत्र दिया गया। उनके गाँव पालिका कार्यालय के आँकड़ों के अनुसार उन्हें इस तरह के दर्जनों सम्मान और पत्र मिले हैं।वरिष्ठ पत्रकार शम्भु पंथ के अनुसार, उन्होंने मर्चवार के समग्र विकास के लिए कुछ करने की योजना को आगे बढ़ाया है। जितेन्द्र भारत के साथ आसानी से तरनी नाका खोलने की पहल कर रहे हैं, जबकि मार्च में कृषि के लिए कृषि उत्पादों के उत्पादन के लिए एक कारखाना स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। गाँव पालिका में आधुनिक और गुणवत्ता वाले तकनीकी विद्यालयों की स्थापना और उच्च प्रौद्योगिकी के अनुकूल अस्पतालों और मर्चवार के कृषि क्षेत्र में आसान सिंचाई के प्रावधान को देखा जा सकता है। जितेन्द्र की राज्य सरकार और संघीय सरकार से मांग की गई है कि लुम्बिनी रोड से मर्चवार की सीमा तक पक्की सड़क का निर्माण किया जाए। शुक्ला ने मर्चवार क्षेत्र में 24 घंटे बिजली आपूर्ति शुरू की है। यदि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कृषि के विकास के लिए उनकी योजनाएं पूरी होती हैं, तो मर्चवार नेपाल का एक विकसित और उज्ज्वल क्षेत्र बन जाएगा।यहा आशा करते हैं कि जितेन्द्र के बीबी और बच्चो का तयाग मर्चवार की जनता इस करोना के बिरुध लडाइ मे याद राखेगी और बब्लु शुक्ला का यह ऐतीहासीक कार्य मर्चवार के इतिहास मे स्वर्णिम अक्षरो मे लिखा जयेगा हम अपने पत्रिका के मध्याम से आसा और उमीद करते है मर्चवार भी शुक्ला जी नेत्तृत्व मे स्वर्णिम युग मे प्रवेश करे।
मर्चवार सम्मरीमाई गाँव पालिका के अध्यक्ष जितेन्द्र नाथ शुक्ला,

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