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राष्ट्रीय स्वाधीनता के मामला मे कोइ सम्झौता नही : नारायणकाजी श्रेष्ठ

 

हेटौंडा, माघ २३ – एकीकृत नेकपा (माओवादी) के उपाध्यक्ष तथा उपप्रधानमन्त्री नारायणकाजी श्रेष्ठ ने महाधिवेशन मे प्रस्तुत किये गये अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल का राजनैतिक प्रतिवेदन मे समावेश देश मे अन्तराष्ट्रीय सिमा सम्बन्धी विवाद जनमत संग्रह से समाधन करने का प्रस्ताव हटाने का माग किया है। मंगलबार सवेरे पत्रकारों से बातचित करते हुये  श्रेष्ठ ने कहा कि इस विषय जनमत संग्रह नही करायी जा सकती।
श्रेष्ठ ने भारत के साथ की गयी बिप्पा सम्झौता राष्ट्रहित के विपरित बताते हुये इसे महाधिवेशन से इसके विरुद्ध प्रस्ताव पास करने का अडान राखा है । अगर महाधिवेशन से इस विषय का सामाधान नही निकला तो महाधिवेशन तरन्तबाद छ महिना के अन्दर पहला विस्तारित बैठक राखकर इस विषय का निर्णय का प्रावधान महाधिवेशन से ही होने का माँग रखा है । उपाध्यक्ष श्रेष्ठ ने राष्ट्रीय स्वाधीनता की बात उठाते आरहें हैं लेकिन उन्होने स्पस्ट किया कि वे महासचिव वनने के लिये कोई बार्गेनिङ नही कर रहें हैं ।
उन्होने कहा कि भारत को देखने के प्रति पार्टी मे जरुर अलग अलग धारणा है   ‘भारत पडोसी राष्ट्र है, उसका विरोध ही करना पडेगा ऐसी कोइ बात नही है । लेकिन, नेपाल की राष्ट्रीय सार्वभौमिकता, स्वाधीनता, और राष्ट्रीय हित की रक्षा के लिये विदेशी हस्तक्षेप का विरोध जरुर करना पडेगा। हस्तक्षेप का विरोध करना भारत का विरोध नही है । हम राष्टीय स्वाधीनता के मामला मे किसी से सम्झौता नही करंगे।

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उन्होने आगे कहा कि इसके अतिरिक्त अध्यक्ष दहाल व्दारा पेश किये गये राजनैतिक प्रतिवेदन के मुख्य विषयों पर अपन कोइ मतभेद नही है । शनिबार हेटौंडा मे सुरु हुआ माओवादी का सातवाँ राष्ट्रीय महाधिवेशन का आइतबार साम से बन्द सत्र सुरु हो गया है। बन्दसत्र मे समूहगत बातचित का निचोड रख्ने का कार्यक्रम आज से सुरु हो गया है। महाधिवेशन बिहीबार तक चलने का कार्यक्रम है।

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