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पीडि़त जनता समिधा बन कर स्वाहा होने के लिए तैयार है : डा. श्वेता दीप्ति

 

हिमालिनी 2021 जनवरी अंक, (सम्पादकीय) | यों तो हर साल अपने पीछे कई दास्तान छोड़ जाता है, फिर तारीखें बदल जाती हैं और हम एक नए सिरे से आगे की ओर अपने कदम बढ़ा देते हैं । पर २०२० अपने पूरे समय में कई इतिहास रच गया । जिसमें सबसे भयावह रहा मौत का क्रुर इतिहास जो कोविड–१९ के नाम से २०२० के पन्ने पर अंकित हो चुका है । एक महामारी, जिसने वैश्विक स्तर पर हमें निचोड़ लिया । हर रोज जिन्दगी और मौत के बीच हम साँसें लेने लगे हैं । यह साया आज भी हमारे सरों पर मँड़रा रहा है । ऐसे में जब जिन्दगी से अधिक आम इंसान को मौत पर यकीन होने लगा है, तब नेपाल की राजनीति में जो स्वार्थ–पूर्ण राजनीतिक होड़ लगी हुई है, वह देखकर आश्चर्य होता है । इन्हें तो मौत का भी डर नहीं तभी तो कुर्सी का मद और मोह नहीं जा रहा । नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक दो–तिहाई बहुमत की सरकार का संसद विघटन करना एक ऐसा कु–प्रयास है, जिसने नेपाल की राजनीति में एक काला पन्ना दर्ज करा लिया है । मध्यावधि चुनाव की हवन में बीमारी, बेरोजगारी, गरीबी से पीडि़त जनता समिधा बन कर, स्वार्थ की बलिवेदी पर स्वाहा होने के लिए तैयार हैं ।

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यह देश की विडम्बना है कि यहाँ की राजनीति युवाविहीन है, जो गिने–चुने चेहरे हैं, जिनसे कुछ नए की उम्मीद जनता कर सकती है, उन पर पुराने चेहरे कुछ इस कदर हावी हैं कि, उनका कोई स्वतंत्र अस्तित्व निखर कर जनता के सामने नहीं आ रहा है । जनता के समक्ष वो प्रतिनिधि हैं, जो उनके लिए नहीं सोचते स्वयं के लिए सोचते हैं । उनमें जिनका सिक्का चल जाता है वह कुर्सी पर आसीन होते हैं और जिनका नहीं चलता वो जनता के शुभचिन्तक बन सड़कों पर अपना आसन जमा लेते हैं । यही है राजनीति का खेल, जहाँ मदारी भी वही हैं और खिलाड़ी भी वही हैं । जनता तो बस दर्शक है । यह शायद किंवदन्ती के अनुसार शापित देश की शापित राजनीति है, जिसे स्थायित्व और विकास से अधिक उथलपुथल की नियति मिली हुई है ।

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२०२१ का हम स्वागत कर चुके हैं । आइए उम्मीद करें कि आने वाला वक्त हमारे लिए सुखद अहसास लेकर आए । हिमालिनी अपने चौबीसवें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है । पाठकों और विज्ञापनदाताओं तथा शुभाकांक्षियों का सहयोग हिमालिनी परिवार को मिलता रहा है और आगे भी मिलेगा यह पूरी उम्मीद है । हिमालिनी नए तेवर के साथ आपकी सेवा में सदैव तत्पर है । विश्व की सबसे मीठी भाषा हिन्दी है और जनवरी का महीना इस लिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि १० जनवरी विश्व हिन्दी–दिवस के रूप में मनाया जाता रहा है । नव–वर्ष, हिन्दी दिवस और हिमालिनी के जन्मोत्सव पर आपके सहयोग और स्नेह की आकांक्षा के साथ समग्र सुधीजन को अशेष शुभकामनाएँ ।

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डॉ श्वेता दीप्ति, सम्पादक हिमालिनी

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