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कान्ति भैरव विद्यालय पुननिर्माण में भारतीय सहयोग, दूतावास के नियोग उप–प्रभुख खम्पा ने की सुभारम्भ

 

काठमांडू, १८ फरवरी । काठमांडू जिला कागेश्वर नगरपालिका स्थित श्री कान्ति भैरव माध्यामिक विद्यालय का पुननिर्माण कार्य शुरु हो गया है । बिहिबार एक विशेष कार्यक्रम मार्फत राष्ट्रीय पुननिर्माण प्राधिकरण के प्रमुख कार्यकारी अधिकृत सुशील ज्ञावली और नेपाल स्थित भारतीय राजदूतवास के नियोग उप–प्रमुख श्रीमती नामग्या सी. खम्पा ने संयुक्त रुप में भूमि पुजन कर पुननिर्माण का शुभारम्भ किया ।
कान्ति भैरव माध्यमिक विद्यालय २६.६ करोड नेपाली रुपयों में पुननिर्माण हो रहा है । वि.सं. २०७२ की भूकंप के कारण क्षतिग्रस्त विद्यालय भवन निर्माण के लिए भारतीय सहयोग प्राप्त है । भूकंप के कारण क्षतिग्रस्त शिक्षा, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक सम्पदा तथा आवास क्षेत्र पुनर्निर्माण परियोजना के लिए भारत सरकार ने नेपाल को कूल २५० मिलियन अमेरिकी डॉलर आर्थिक सहयोग की प्रतिबद्धता व्यक्त की है । उसी परियोजना अन्तर्गत कान्ति भैरव विद्यालय निर्माण हो रहा है ।
स्मरणीय है, शिक्षा क्षेत्र के लिए भारत सरकार ने नेपाल को ५० मिलियन अमेरिकी डॉलर सहयोग के लिए प्रतिबद्घता व्यक्त की है । परियोजना अन्तर्गत ७१ शैक्षिक संस्था पुनिर्माण हो रहा है । भारतीय दूतावास के अनुसार गोरखा और नुवाकोट जिला के ८ विद्यालय भवन का निर्माण कार्य सम्पन्न हो चुका है और बांकी ५६ विद्यालय भवन निर्माणाधीन है ।
भारतीय सहयोग परियोजना अन्तर्गत निर्माणाधीन कान्ति भैरव माध्यमिक विद्यालय भवन नेपाल सरकार द्वारा निर्धारित भूकम्प प्रतिरोधी मापदण्ड अनुसार निर्माण हो रहा है । नव निर्मित भवन तीन मंजीलों की होगी, जहां ३० क्लासरुम, पुस्तकालय और प्रयोगशाला, छात्र–छात्राओं के लिए अलग–अलग सफाई कक्ष जैसी सुविधाएं रहेगी । विद्यालय निर्माण के लिए केन्द्रीय भवन अनुसन्धान संस्थान (सीबीआरआई) रुड्की द्वारा प्राविधिक सहयोग प्राप्त है । यह संस्था भूकम्प प्रतिरोधी पुनर्निर्माण क्षेत्र में काम करनेवाले भारतीय संस्थाओं में से शीर्ष है ।
कान्ति भैरव माध्यमिक विद्यालय पुननिर्माण कार्य शुभारम्भ करते हुए भारतीय दूतावास के नियोग उप–प्रमुख श्रीमती नामग्य सी. खम्पा ने कहा कि भारत और नेपाल बीच विकास निर्माण संबंधी कार्य में जो सहकार्य और साझेदारी हो रही है, वह दो देशों की मजबूत संबंध दिखाती है । उन्होंने यह भी कहा है कि भूकंप के कारण नेपाल में जो सामाजिक और आर्थिक क्षति हुई है, उसको पुनस्र्थापित करने के लिए भारत सदैब तयार है और आसपी सहकार्य से संबंध को आगे बढ़ाने के लिए भी भारत प्रतिबद्ध है ।

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