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फिनलैंड लगातार चौथे साल दुनिया का सबसे खुशहाल देश, नेपाल 87वें नंबर पर

 

संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रायोजित वर्ल्ड हैपीनेस रिपोर्ट में फिनलैंड को लगातार चौथे साल दुनिया का सबसे खुशहाल देश पाया गया है। भारत 149 देशों की इस सूची में 139वें नंबर पर है।

इस रिपोर्ट में पाया गया है कि  कोरोना महामारी से सबक लेते हुए पूंजी नहीं स्वास्थ्य पर जोर देना होगा संयुक्त राष्ट्र के सस्टेनेबल डेवलपमेंट सॉल्यूशन्स नेटवर्क द्वारा जारी वर्ल्ड हैपीनेस रिपोर्ट के अनुसार, खुशहाल देशों की सूची में आइसलैंड दूसरे, डेनमार्क तीसरे नंबर पर है।

फिर स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड, स्वीडन, जर्मनी, नॉर्वे हैं। शीर्ष-10 में शामिल अकेला गैर यूरोपीय देश न्यूजीलैंड एक अंक फिसलकर नौवें स्थान पर आ गया है। दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका इस सूची में पिछले साल 18वें नंबर पर था, तो इस बार 14वें नंबर पर है।

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इसी तरह ब्रिटेन पांच अंक फिसलकर 18वें नंबर पर आ गया है। रिपोर्ट को तैयार करने में 149 देशों में खुशहाली का स्तर पता करने के लिए गैलप के आंकड़ों का प्रयोग किया गया है। मुख्य रूप से जीवन की गुणवत्ता, सकारात्मक और नकारात्मक भावों के आधार पर इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है।

चीन खुश देशों में 20वें नंबर पर
रिपोर्ट के अनुसार, बुरूंडी, यमन, तंजानिया, हैती, मालावी, लेसोथो, बोत्सवाना, रवांडा, जिम्बॉम्बे और अफगानिस्तान भारत से कम खुशहाल देश हैं। इसी तरह पड़ोसी मुल्क चीन पिछले साल इस सूची में 94वें स्थान पर था, जो अब उछलकर 19वें स्थान पर आ गया है। नेपाल 87वें, बांग्लादेश 101, पाकिस्तान 105, म्यांमार 126 और श्रीलंका 129वें स्थान पर है।

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क्या आप बीते दिन खूब हंसे थे
सकारात्मक भाव की श्रेणी में सर्वे में शामिल लोगों से पूछा गया था कि क्या आप पिछले दिन खूब हंसे या मुस्कुराए थे। इसी तरह नकारात्मक भावों में ये पूछा गया कि जिस दिन आप हंसे या मुस्कुराए थे, क्या उस दिन आप किसी बात को लेकर निराश हुए थे। इसी तरह जीवन की गुणवत्ता के आधार पर लोगों के संतोष भाव को जाना गया है।

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महामारी से हमें सीखना होगा
रिपोर्ट के अनुसार, महामारी के बीच फिनलैंड में लोगों के बीच आपसी विश्वास देखा गया। यहां के बीच लोगों में एक-दूसरे का जीवन बचाने और मदद करने का भाव देखा गया। रिपोर्ट तैयार करने वाले जेफरी सच्स का कहना है कि कोरोना महामारी से हमें सीखना होगा। महामारी ने दुनिया को बताया है कि पूंजी से ज्यादा जोर स्वास्थ्य पर देना होगा।

 

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