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अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा : स्मृति श्रीवास्तव

 

हिमालिनी, अंक मार्च 2021।  मेरा नाम स्मृति श्रीवास्तव है । मैं त्रिभुवन विश्वविद्यालय से हिंदी विषय में स्नातकोत्तर कर रही हूँ । वर्तमान में छात्रा, पत्नी और मां की भूमिका निभाने के साथ हिंदी शिक्षिका के रूप में भी कार्य कर रही हूँ । मुझे सिर्फÞ सच्चे लोगों के साथ समय बिताना अच्छा लगता है, इसलिए ज्यादा मित्र नहीं बना पाती । लोगों की किसी और के लिए बोला गया मामूली झूठ भी मुझे भीतर तक आहत कर देता है । इसलिए मैं अपने काम के साथ समय बिताना ज्यादा पसंद करती हूं । मेरे कई शौकÞ हैं, बागवानी, प्रियजनों के लिए खाना बनाना, बच्चों और जीव जंतुओं के साथ समय बिताना, कुछ नया सीखना, अपने घर को व्यवस्थित रखना, अपने ऊपर ध्यान देना ।

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मेरा जन्म भारत की ऐसे जगह में हुआ जहाँ हिंदी भाषा को प्राथमिकता दी जाती थी । बचपन से ही हिंदी परिवेश में होने के कारण मेरी रूचि इस क्षेत्र में ज्यादा हुई ।

शिक्षा हम सभी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है । हमारे माता–पिता हमें घर पर ही बहुत सी चीजें सिखाते हैं । हमारा घर ही हमारा पहला शैक्षणिक संस्थान है, जहाँ हम दूसरों के साथ व्यवहार करना, और अन्य कौशल को सीखते हैं । हमारे परिवार ने हमें बिना भेदभाव किए शिक्षा हासिल करने में साथ दिया है । शादी के बाद पति एवं परिवार के सहयोग से मैं अपने सारे दायित्व का निर्वाह कर पा रही हूँ । बच्चे अपना काम खुदकर मेरी सहयोग करते है ।महिला हूँ बावजूद इसके बाहर की दुनिया में मै अपने आपको बहुत हद तक सहज महसूस करती हूँ । हमारे समाज की महिलाओं को मै यह संदेश देना चाहूंगी की उन्हें अपने अधिकारों के लिए आगे आना होगा और अपनी कार्यक्षमता से अपनी शक्ति का और स्वयं के सशक्त होने का परिचय देना होगा ।

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स्मृति श्रीवास्तव
शिक्षिका, डी.ए.वी. स्कूल, काठमाण्डू।

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