प्रदेश नंबर दो में प्रज्ञा प्रतिष्ठान स्थापना के लिये पहल
28/ 11/ 2021 रविवार के दिन नेपाल के दो नंबर प्रदेश के राज्यपाल/ प्रदेश प्रमुख सम्माननीय श्री हरिशंकर मिश्रा जी से इस प्रदेश में नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के रूप में एक प्राज्ञिक संस्था स्थापना हेतु संवाद और छलफल हुआ। इसमें ‘नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान कमलादी’ के प्रज्ञिक सभा के सदस्य आदरणीय साहित्यकार श्री महेश्वर राय के नेतृत्व में जनकपुर के स्थापित पत्रकार तथा साहित्यकार क्रांतिकारी व्यक्तित्व श्री राजेश्वर नेपाली , साहित्यकार श्री चंदेश्वर राय चमन और साहित्यकार अजयकुमार झा के गरिमामय उपस्थिति रही। प्रदेश प्रमुख श्री हरिशंकर मिश्रा जी के अति सौम्य स्वभाव के कारण संवाद का माहौल पारिवारिक स्वरूप का ही रहा। पदीय अहंकार का लेश मात्र भी न दिखना उनकी गरिमा को सुशोभित करता जा रहा था। संवाद के क्रम में “कानून सम्मत हर प्रकार के सहयोग के लिए मैं हर पल तयार हूं” यह प्रदेश प्रमुख का महावाक्य था। संघीय प्रणाली और लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए सबका सहयोग आवश्यक है; लोकतंत्र का सुगन्ध और मिठास सभी नागरिक को उनके घर तक पहुंचने के लिए संघीय प्रणाली परमावश्यक है। अतः प्रदेश सरकार हर उस कार्य को सम्पन्न कराने के लिए विशेष रूप से तत्पर है; जिससे आम नागरिक को वर्तमान और भविष्य में ठोस उपलब्धि हासिल हो।
महेश्वर बाबू के निवेदन पर उन्होंने खुद को मार्ग प्रशस्त करने का प्रतिनिवेदन कर डाला। इसमें भी एक सम्मान और हार्दिक माधुर्य छुपा हुआ था। इसी दौरान नेपाल के सच्चे विभूति परम आदरणीय श्री रामनारायण मिश्रा जी के व्यक्तित्व को युवा पीढ़ी के हृदय में बसाने के लिए विशेष शैक्षिक कार्यक्रम के मेरे प्रस्ताव तथा उनके जन्म शताब्दी पर वृहद कार्यक्रम के लिए श्री राजेश्वर नेपाली जी के प्रस्ताव पर खुलकर संवाद करते हुए उन्होंने पहले एक वृहद कार्यक्रम आयोजित करने पर जोर दिया। चंदेश्वर राय चमन जी के द्वारा साहित्य और साहित्यकारों के सम्मान और विकास के लिए मार्ग प्रशस्त करने हेतु दिए गए प्रस्ताव को भी बड़ी ही आतुरता और हार्दिकता के संबोधित करते हुए उन्होंने अपनी अधिकार सिमितता के संकेत को भी स्पष्ट कर रहे थे। फिर भी अपनी ओर से हर संभव प्रयास करने का खुलकर वादा भी किए।
संवाद के क्रम में हमने महसूस किया कि प्रदेश दो पर केंद्र सरकार का विशेष दबाव है। वह सरकार को असफल करने का भी हो सकता है अथवा संघीय प्रणाली को अस्तव्यस्त करने का षड़यंत्र भी। प्रदेश के लिए बलिदान देने वाले मधेशियों के द्वारा ही प्रदेश प्रणाली को बदनाम, असफल और भ्रष्टाचार का फलता फूलता व्यापार के रूप में जन मानस में स्थापित कर यहीं के जनता द्वारा अपने ही विरुद्ध आवाज उठाने पर मजबूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
और हम मधेसी नेता – कार्यकर्ता और कर्मचारी इसके मौलिक षड़यंत्र से अनभिज्ञ हैं; अन्यथा हम ब्रह्मलूट में सहयोग नहीं करते। अख्तियार द्वारा रंगे हाथो पकड़े जाना इस प्रदेश को अपमानित करने वाली षड़यंत्र में शामिल होना है। अपनी ही भूमि और शहीदों के साथ गद्दारी करना है।
नोट: हमें तो इन पांच वर्षो में अपनी प्रदेश को मजबूत, सम्मानित तथा भ्रष्टाचार रहित बनाए रखने के लिए जी जान से सक्रिय होना चाहिए था जो कि इसके विपरित परिस्थितियों से हमें गुजरना पड़ रहा है। सभी जिम्मेवार पक्ष के चारित्रिक संस्कार ही इस भूमि को सभ्य बनाते हुए पुनः राज ऋषि जनक और शिलवान सीता तथा महाप्रज्ञ याज्ञवल्क्य और गार्गी के गरिमा को उपलब्ध कर सकेगा।



