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पंचतत्त्व में विलीन हुईं सरस्वतीपुत्री,ये वसंत हमसे रूठ गया,सदा के लिए,ये सरस्वती का सुर विराम है।

 

ये वसंत हमसे रूठ गया, सदा के लिए… ये सरस्वती का सुर विराम है।पंचतत्त्व में विलीन हुईं सरस्वती पुत्री

शब्द के ब्रह्म स्वरूप को प्रतिष्ठित करने वाला स्वर इस लोक में अपना कार्य पूरा कर महाप्रयाण कर गया। इस लोक की उनकी यात्रा का वर्णन करने के लिए शब्द अपूर्ण हैं और तमाम श्रद्धांजलि अधूरी।


बहरहाल, स्वर की यह देवी मानों वसंत के अभिषेक की ही प्रतीक्षा कर रही थीं। स्वर, शब्द, विद्या और ज्ञान की देवी के उत्सव को मना लेने के बाद लताजी ने अपने शरीर को विराम दे दिया। ये इत्तफाक ही है कि जिस गीत ए मेरे वतन के लोगों, ने उन्हें एक नई पहचान दी थी उसको लिखने वाले कवि प्रदीप का आज जन्मदिन भी है। आज ही लता स्वर्ग के लिए प्रस्थान कर गईं।

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लताजी को बहुत से तरीकों से याद किया जा रहा है, किया जाता रहेगा। कहा जा रहा है कि उन्हें कितने पुरस्कार मिले। उन्हें कोई पुरस्कार नहीं मिला, पुरस्कारों को वह मिलीं। शब्द, स्वर, लय, ताल, साज का वह मिलन, जिसे कोई परिभाषित नहीं कर सकता, बस अपने तरीके से महसूस कर सकता है। उनके कंठ से कला के सभी रूप नित नए आकार लेते थे। शब्द नर्तन करते और सुर चित्र रचते। लोरी से लेकर देशभक्ति तक, प्रेम से विरह तक, उल्लास से उदासी तक, अकेलेपन से उत्सव तक हर भाव को अभिव्यक्त करते उनके गीत यह नाद कर रहे थे कि स्वर कोकिला अपने मिशन में पूरी तरह कामयाब हुईं। उनकी आवाज़ फिज़ाओं में थी और वह खुद भी सशरीर उपस्थित थीं, अब उनका शरीर नहीं रहेगा, पर आवाज़ ताकायनात रहेगी।

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लता जी का अंतिम संस्कार शिवाजी पार्क में हुआ। उनके भाई हृदयनाथ मंगेशकर के बेटे आदित्य उन्हें मुखाग्नि दी। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उन्हें अंतिम विदाई देने मुंबई पहुंचे ।
हजारों लोगों ने दी अंतिम विदाई
इससे पहले, सेना के जवान लता जी के पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटकर घर से बाहर लाए। इसके बाद आर्मी, नेवी, एयरफोर्स और महाराष्ट्र पुलिस के जवानों ने उनकी अर्थी को कंधा दिया। उनका पार्थिव शरीर फूलों से सजे सेना के ट्रक में रखकर शिवाजी पार्क ले जाया गया। मुंबई के हजारों लोग लता ताई को अंतिम विदाई देने सड़कों पर उतर आए। ब्रीच कैंडी अस्पताल से लता जी की पार्थिव देह दोपहर 1.10 बजे उनके घर पहुंची थी।- नेपाल की राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन पर शोक व्यक्त किया।  श्वेता दीप्ति (सम्पादक)

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