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नेपाली कांग्रेस में शेखरपक्ष द्वारा विद्रोह की चेतावनी

 


काठमांडू, २५सितंबर — गठबन्धन दल के बीच चुनावी तालमेल मिलाने के लिए कांग्रेस सभापति तथा प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवा दिन रात जुटे हुए हैं ।बालुवाटर में हुए बैठक में नेता शेखर कोइराला के समूह ने मिलकर पार्टी भीतर विद्रोह करने की चेतावनी दिया है ।
शेखर समूह ने शनिबार को बालुवाटार में प्रतिनिधिसभा और प्रदेशसभा के सिट बँटवारे में समझदारी बनाने के लिए हुई बैठक में भी अपने गुस्से को जाहिर किया था । बैठक में अभी भी सीट संख्या और निर्वाचन क्षेत्र में भी सहमति नहीं हो पाई है । गठबंधन के अन्य दलों के नेता और शेखर पार्टी के नेताओं ने आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की योजनाओं को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उनके समूह के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ अगर अन्याय किया गया तो अचछा नहीं होगा । कांग्रेस के भीतर की समस्याओं से गठबंधन पर असर पड़ेगा कहते हुए प्रचण्ड प्रधानमंत्री देउवा का ध्यान खींच रहें हैं ।

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शेखर समूह ने प्रत्यक्ष की ओर से ही नहीं असोज ३ में दिए गए समानुपातिक की ओर से बन्दसूची में दिए गए नामों को भी ठीक करने की मांग की है । निर्वाचन आयोग ने असोज १६ तक की समय सीमा में ४० प्रतिशत तक उम्मीदवार रखने की मांग की है । शनिबार को हुई बैठक में शेखर, उनके पक्ष के पदाधिकारी और शीर्ष नेताओं की सहभागिता नहीं थी । बैठक में आयोजक मध्य के नेता जगदीशनरसिंह केसी समूह के नेता और पदाधिकारी तथा पूर्वपदाधिकारी को नहीं बुलाया गया था । दूसरे तह के नेताओं ने बैठक में अनशन, धर्ना और निर्वाचन बहिष्कार तक के वैकल्पिक संघर्षो की योजना को सामने रखा और नेतृत्व पर तत्काल ठकि करने के लिए दबाब बनाया है ।

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‘चालीस प्रतिशत भागबन्डा के सूत्रधार, योजनाकार और पहिले प्रयोगकर्ता स्वयं शेरबहादुर ही हैं , हम उनके पीछे खड़े हैं । समानुपातिक उम्मेदवार की चयन में अन्याय करने पर बाध्य होकर हम चालीस प्रतिशत की सुनिश्चितता खोज रहें हैं ।गुरु घिमिरे ने कहा – ‘हमारे समूह के नेता चालीस प्रतिशत सम्मानजनक हिस्सा मांग रहें हैं लेकिन नेतृत्व देना नहीं चाह रहा है ।

शेखर और महामन्त्री थापा ने सौ सीट को लेकर शुरु दिन से ही अड़े हैं । शेखर अपने इस अड़ान से अभी भी पीछे नहीं हटे हैं । गठबन्धन में आबद्ध माओवादी, एकीकृत समाजवादी और जनता समाजवादी पार्टी कांग्रेस को ५० प्रतिशत से ज्यादा सीट देने को तैयार नहीं होने के बाद देउवा ने उस में अपनी सहमती का संकेत दे दिया था जिसके कारण से थापा बैठक में अनुपस्थित होने लगे ।

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