चार पल मीठे वचन से बोलना आसाँ : उदय खनाल ” उमेश”
प्रेम का बन्धन जगत में जोड़ना आसाँ।
किन्तु उसको निभाना है नहीँ आसाँ।।१।।
प्रेम के दो बूँद अमृत है सुलभ सबको
मौत तक उसको पिलाना है नहीं आसाँ।।२।।
चार पल मीठे वचन से बोलना आसाँ।
उम्र भर उसको सजाना है नहीं आसाँ।।३।।
दो कदम तक साथ देना सबको भाता है।
अंत तक पग पग मिलाना है नहीं आसाँ।।४।।
कल्पना की रंगरलियों की कमी किसको ।
किन्तु उसको मूर्त करना है नहीं आसाँ ।।५।।
सोच ले हर कोई दो क्षण , फिर कदम रखे।
प्रेम पथ से लौट जाना है नहीं आसाँ ।।६।।
जब तलक बच जाय कोई शुक्र है उसपर।
बँध गये तो फिर निकलना है नहीं आसाँ।७।।
सुख में रहकर दुख की बातें है भली लगती।
दुख के लपटों से उलझना है नहीं आसाँ।।८।।
आँख रखकर अंध-अभिनय है नहीं मुश्किल।
अंध होने पर संभलना है नहीं आसाँ।।९।।



