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सीताराम विवाह पंचमी महोत्सव के तीसरे दिन धनुष यज्ञ का हुआ आयोजन (फोटो सहित)

 

जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। सीताराम विवाह पंचमी महोत्सव के तीसरे दिन जानकी मंदिर के प्रांगण में धनुष यज्ञ आयोजित किया गया। रंगभूमि मैदान में राजा विदेह ने सीता के विवाह के लिए धनुष यज्ञ आयोजित करते हैं। शिव का पिनाक धनुष सीता बाल्यकाल में ही उठा ली थी।जिस धनुष को उठाना बड़े बड़े वीरो की वंश की बात नहीं थी।उसी दिन राजा जनक ने प्रण कर लिया था कि जो राज कुमार इस धनुष को तोड़ेगा।उसी के साथ सीता की विवाह की जाएगी। धनुष यज्ञ में कई देशों के राजा पहुंचे थे। धनुष यज्ञ में राजा जनक अयोध्या के राजा दशरथ को आमंत्रित नहीं किया था। धनुष यज्ञ की शुरुआत की जाती है। सभी राजकुमार अहंकार से मदद होकर धनुष को तोड़ने के लिए जाते हैं, लेकिन धनुष टस से मस नहीं होता है। जव सभी राजकुमार थक गये कोई पिनाक धनुष नहीं तोड़ सके तो राजा जनक तथा रानी सुननयना काफी चिंतित हो गयी है।

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राजा जनक ने कहा कि लगता है की यह धरा (पृथ्वी)वीरहीन हो गया है। इतना सुनते ही लक्ष्मण क्रोधित हो जाते हैं। लेकिन बिश्वामित्र उसे शांत करते हैं।राम गुरु विश्वामित्र को आदेश लेकर दण्वत करके धनुष तोड़ने के लिए जाते हैं। वहां उपस्थित राजकुमार राम को देखकर उपहास उड़ाते हैं। प्रभु राम जैसे ही धनुष उठाते हैं। धनुष तेज ध्वनि के साथ भंजन हो जाता है। पृथ्वी कांपने लगती है।पूरे जनक दरवारी में प्रसन्नता की लहर दौड़ जाती है। अयोध्या के कलाकारों ने राम, लक्ष्मण, विश्वामित्र, वशिष्ठ तथा अन्य राजकुमार की भूमिका में थी। इस धनुष यज्ञ में जानकी मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास बैष्णव, उत्तराधिकारी महंत रोशन दास बैष्णव, बड़ी संख्या में साधु संत तथा भारत -नेपाल से आए हजारों श्रद्धालुओं ने धनुष यज्ञ को देखा।

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