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“परंपरा का मुकाबला: दहेज और अलिमोनी (गुजारा भत्ता) को गैरसंवैधानिक, अवैध और मानव सम्मान के खिलाफ ठहराया गया है” : विकाश प्रेममय

 


विकाश प्रेममय, लहान, सिरहा । आज के दौर में विवाह धार्मिक, सांस्कृतिक, समाजिक और कानुनी मामलों से ऊपर उठ कर एक निजी मामला बन चुका है । विवाह एक निजी मामला है” प्रसिद्ध नाइजीरियाई लेखक चिनुआ अचेबे द्वारा लिखा गया लेख में उन्होंने एक मैरिज रिलेशन को निजी मामला बताया है । विवाह और विवाह से जुड़े मामलों को देखने के लिए सभी देश में कानून का निर्माण किया गया है । नेपाल की बात की जाए तो मुलुकी देवानी संहिता,२०७४ के भाग ३ में पारिवारिक कानून अंतर्गत परिच्छेद १ से लेकर परिच्छेद ११ तककी व्यवस्था की गई है । परिवार से जुड़े मामलों में विवाह और संबंध विच्छेद आज की दौड़ में बहुत गंभीर मामलाओं में से एक मानी जाती है । नेपाल की कानून की बात की जाए तो विवाह एक पुरुष और महिला किसी भी उत्सव, समारोह औपचारिक व किसी भी कार्य से एक दूसरे को पति-पत्नी के रूप में स्वीकार करें तो उसे विवाह की दर्जा दी गई है । नेपाल में विवाह को एक सहमति में आधारित स्थाई, अनतिक्रम्य तथा स्वतंत्र सामाजिक और कानूनी बंधन की दर्जा दी गई है । नेपाल में विवाह के कानून प्रगतिशील होने के बावजूद संबंध विच्छेद के मामलों में पुरुष के लिए थोडी कठिनाई से भरी हुई है । नेपाल में दहेज को गैर कानूनी करार दिया गया है । मुलुकी अपराध संहिता, २०७४ भाग २ परिच्छेद ११ के धारा १७४ के उपधारा १ में विवहा में लेनदेन करना गैर कानुनी हैं । अलिमोनी (गुजारा भत्ता) महिलाओं के आत्म सम्मान और आर्थिक उन्नति प्रगति के खिलाफ है । गुजरा भत्ता महिलाओं को जीवन भर पुरुष पर निर्भर होने की बहुत बड़ी साजिश्ताकानून का निर्माण किया गया है । जितनी शहज से विवाह संपन्न हो जाता है, उतने ही असहज संबंध विच्छेद के दौराना होते हैं। मुख्यतः दो कारण दिखाई देते हैं – पहला, गुजारा भत्ता, और दूसरा, पति की संपत्ति में से अंश।” । नेपाल के संविधान के भाग तीन धारा १६ के उपधार १ सभी नागरीक को में सम्मान पूर्वक जीने का हक का व्यवस्था की गई है और धारा १८ में लिखा गया है कि सभी नागरिकों को कानून की दृष्टि से सम्मान नजर से देखी जाएगी और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा मगर मौलिक हक के धारा ३८ में महिलाओं के हक संबंधी उपधारा १ में प्रत्यके महिला को लैंगिक भेदभाव के बिना समान रूप से वंशीय हक कि अधिकार दी गई हैं । फिर भी धारा ३८ के उपधारा धर ६ में ही संपत्ति और पारिवारिक मामलों में दंपति को समान हक की व्यवस्था दी गई है जबकी यह पुरुष के मामले में लागू नहीं होता है और ये उपधारा, धारा १८ कि उपधारा १ और २ के खिलाफ हैं । नेपाल सरकार और महिला के हकहिकत के लिए काम कर रही संस्थाओं को महिला को आर्थिक रूप से सशक्त और पैतृक संपत्ति में कैसे अधिकार मिले उसे चीज पर ध्यान देने चाहिए ना कि कैसे महिलाओं को जीवन भर पुरुष पर निर्भर बनाया जाए इस चीज पर ध्यान और कानुनी व्यवस्था की जानी चाहिए । इसीलिए मेरा व्यक्तिगत और निजी धारणा यह है कि जितना सहज और सरल विवाह है उतना ही सहज और सरल संबंध विच्छेद भी होनी चाहिए ना कि गुजारा भत्ता और पति के संपत्ति में अधिकार की वजह से इसको जटिल बनाना चाहिए । मेरी अपनी व्यक्तिगत धारणा यह है कि सभी व्यक्ति को सम्मान के साथ अपने अपने पैतृक संपत्ति में अधिकतर होनी चाहिए और अपने जीवन के लिए स्वयम आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने की चेष्टा करनी चाहिए । इसीलिए मैं नेपाल सरकार को गुजारिश करता हूं कि जैसे दहेज को मुलुकी अपराध संहिता २०७४ में रखा गया है इसी तरह गुजारा भत्ता को भी मूलुकी अपराध संहिता में रखा जाए और उसे भी गैर कानूनी की दर्जा दी जाए ।

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