Thu. Jun 18th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

युवा चले विदेश… वृद्धों के हाथ में देश

 

काठमांडू, सावन ९– कहते हैं युवा हमारे समाज को, देश को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । हमारे युवा, हमारा भविष्य हैं । लेकिन आज का युवा किसी तरह अपना जीवन नहीं गुजरना चाहता है वह चाहता है कि उसे हर सुख सुविधा मिले ताकि वह सुख से रह सकें । खुशी हासिल कर सके और इसके लिए वह हर कीमत चुकाना चाहता है । इसके लिए ही वह अपनी शिक्षा पर भी जोर देता है ताकि उसकी शिक्षा अच्छी हो और वह अच्छी नौकरी कर सके । अच्छा पैसा कमा सकें । इन्हें अपने देश का नेतृत्व करना है, इन्हें नीति बनानी है, लेकिन क्या जिस तरह के हालात हैं अभी देश के उसमें यह संभव है शायद नहीं । तभी तो हमारे देश के युवा विदेश की ओर उन्मुख हो रहे हैं ।
यह देश अब वृद्धों के हाथ में चला गया है । जहाँ युवाओं का कोई क्रद नहीं है । वो देश को क्या बचेएगा जब रहेगा ही नहीं । युवाओं में उमंग और जोश होता है । लेकिन देश एक के बाद एक राजनीतिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, यहाँ रोजगार के अवसर लगभग खत्म हो चुके हैं ।
अपने देश की शिक्षा नीति में उदासिनता के कारण ही तो बाहर की ओर भाग रहे हैं विद्यार्थी । अपने देश में अपना ही भविष्य अच्छा नहीं दिखने के बाद एक होड़ सी लगी है विद्यार्थियों में विदेश जाकर पढ़ने की ।
एक समय यह भी था कि किसी गाँव के एक परिवार का एक बच्चा बाहर जाता था । उसके लिए सभी की आँखें नम हुआ करती थी क्योंकि वो हर तीज त्यौहार में नहीं आ पाता था । घर के लोग उसका बेसब्री से इंतजार किया करते थे । लेकिन अब हर गाँव हर परिवार, हर शहर के लोग विदेश जाना चाहते हैं कभी चार पैसे कमाने के लिए तो कभी पढ़ाई करने के लिए ।
शिक्षा आर्जन के लिए कोई जाना चाहता है तो जाए लेकिन वहाँ जाने के बाद वहाँ की सुख सुविधाओं को देखने के बाद वहाँ से लौटकर आना नामुमकिन हो जाता है। हलांकी घर के लोग कभी मन से नहीं चाहते कि उनके बच्चें उनसे दूर हो जाएं लेकिन दूसरा कोई विकल्प नहीं है उनके पास वो चाहते हुए भी बच्चों के करियर में बाधा नहीं डालना चाहते हैं ।
इस मामले में हर कोई चाहता है कि अगर भविष्य अच्छा हो , करियर अच्छा हो , आर्थिक तंगी का शिकार न होना हो तो अपने ही घर में रहना अच्छा लेकिन ये संभव नहीं ।
पढ़ाई के लिए तो बात ही छोड़ दें यहाँ तो मजदूर बनाकर ले जाने के लिए भी सिफारिश करते हैं लोग । सावन ७ गते ही तो इजरायल के राजदूत से हमारे मंत्री मिले तो उन्होंने २००० व्यक्तियों को श्रमिक के रुप में ले जाने का आग्रह किया जहाँ सहमति भी हो गई है । ये है हमारे देश की असलियत जहाँ अपने देश के नागरिको को श्रमिक बनाकर भेजने की जल्दबाजी रहती है । प्रत्येक दिन ४००० से ज्यादा लोग विदेश जा रहे हैं । कुछ काम के लिए , कुछ शिक्षा के लिए और कुछ काम और शिक्षा दोनों के लिए ।
ऐसे में आर्थिक वर्ष २०८०÷०८१ में एक लाख १२ हजार ५९३ विद्यार्थी ने वैदेशिक अध्ययन अनुमतिपत्र (एनओसी) लिया है । शिक्षा विज्ञान तथा प्रविधि मन्त्रालय द्वारा सार्वजनिक किए गए तथ्यांक में २०८० साउन १ गते से लेकर ०८१ असार ३१ तक एक लाख १२ हजार ५९३ विद्याथी को एनओसी जारी करने का उल्लेख है । ये तो वो तथ्यांक है जहाँ विद्यार्थी एनओसी ले रहे हैं । बहुतो ने तो लिया भी नहीं है अभी तक । दो तीन हजार विद्यार्थी ऐसे भी हैं जिन्होंने एनओसी नहीं लिया है ।
८० –८१ की अवधि में ९४ विषय पढ़ने के लिए नेपाली विद्यार्थी ६६ देश में गए हैं । सबसे ज्यादा ३४ हजार ७३१ जापान जाने के लिए एनओसी लिया है । दूस्रे नंबर पर कनाडा है । इस वर्ष १५ हजार ९८२ विद्यार्थी ने वहाँ जाने के लिए एनओसी लिया है । तीसरे नंबर पर आष्ट्रेलिया है । यहाँ १४ हजार ३७२ एनओसी जारी की गई है । इसी तरह यूके के लिए १३ हजार ३३९, यूएसए के लिए ११ हजार २६१, कोरिया के लिए ६ हजार ८८९, भारत के लिए दो हजार ३८९ और यूएई के लिए दो हजार १४७ एनओसी जारी की गई है । इस्के अलावे भी अन्य देश में जाने के लिए एनओसी लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या दो हजार से कम है ।
सबसे ज्यादा ३३ हजार ६९७ एनओसी जापनिज भाषा विषय में जारी किया गया है । मैनेजमेंट में २८ हजार ८९१, बिजनेस में १० हजार २९ तथा आईटी में पाँच हजार ९११ एनओसी जारी किया गया है ।
इसी तरह विज्ञान में पाँच हजार ३८४, स्वास्थ में चार हजार १५९, इंजिनियरिंग में चार हजार ४२६, कम्प्यूटर साइन्स में चार हजार ९९२ तथा साइन्स एन्ड टेक्नोालॉजी में चार हजार १०२, हस्पिटालिटी में दो हजार ५४३, आट्र्स में एक हजार ८१३ एनओसी जारी होने का तथ्यांक है । इसके साथ ही अन्य विषय को पढ़ने के लिए एनओसी लेने वालों की संख्या एक हजार से कम है ।
ये वो युवा है जो हमारे देश का भविष्य बनता लेकिन जो जाएगा उसमें से इक्का दुक्का ही वापस अपने वतन को लौटेगा । वो क्या सोचकर समझकर लौटेगा । सरकार इस ओर अपना ध्यान बिल्कुल केन्द्रीत नहीं कर रही है । सत्ता के खेल में ये लोग इतने मगरुर हैं कि इन्हें कुछ नहीं दिखता है । इन्हें यह नहीं दिख रहा है कि हमारा सारा युवा देश से बाहर जा रहा है तो आने वाले समय में क्या होगा ? भविष्य ही दांव पर लगा है हमारा ।
युवा जिसके कंधे पर हम देश का भार डालने वाले हैं उसे ही हम दरकिनार कर रहे हैं । जबतक यहाँ राजनीतिक स्थिरता नहीं आएगी । देश विकास की ओर उन्मुख नहीं होगा, आर्थिक अवस्था अच्छी नहीं होगी । रोजगार की व्यवस्था नहीं मिलती है तबतक देश को इसी नाजुक अवस्था से गुजरना होगा । हमें अपनों को ही खोने को डर बना रहेगा । आज तथ्यांक ये नंबर दिखा रहा है आने वाले समय में ये नंबर और बढ़ने वाला है । तब हमारा देश युवाओं के हाथ में नहीं जाकर वृद्धों के हाथ में दिया जाएगा । जिसका नजारा हम देख ही रहे हैं । वैसे शुरुआत हो चुकी है । हम युवा को तो राजनीति में भी नहीं आने दे रहे हैं । यहाँ भी तो गोल गोल घुम रहा है देश । प्रचण्ड, ओली और देउवा के बीच में झूल रहे हैं देश वासी ।

यह भी पढें   रास्वपा ने भेजा थापा और ओली को विशिष्ट अतिथि के लिए निमंत्रण

 

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed