आज तमांग समुदाय विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर सोनम लोछार मना रहा
आज माघ माह के शुक्ल पक्ष पर तमांग समुदाय विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर नये साल के रूप में सोनम लोछार मना रहा है।
लोछार को धार्मिक और सांस्कृतिक रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाता है, जिसमें पुराने साल को अलविदा कहा जाता है और नए साल का स्वागत किया जाता है, जो 12 जानवरों के नाम के चक्र पर आधारित होता है।
इस त्यौहार को भूमि पूजा, कुल पूजा, प्रसाद चढ़ाकर, नृत्य-गायन, स्वादिष्ट व्यंजन बनाकर और खाकर तथा शुभकामनाओं का आदान-प्रदान करके मनाने की प्रथा है। यह त्यौहार, जो समुदाय के सभी सदस्यों द्वारा सामूहिक रूप से मनाया जाता है, देश के विभिन्न भागों में रहने वाले तमांगों द्वारा अपनी परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है, जिनमें ह्योल्मो, थकाली, जिरेल, नेस्यांग्वा, भोटे, दुरा, लेप्चा और अन्य शामिल हैं। .
यह त्यौहार विशेष रूप से बागमती प्रांत के विभिन्न जिलों में मनाया जाता है, जहां तमांग समुदाय बहुसंख्यक है। राजधानी के टुंडीखेल, बौध और स्वयंभू क्षेत्रों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर लोछार मनाया जा रहा है।
देश के विभिन्न भागों में रहने वाले तमांगों के साथ-साथ अन्य जातीय समूह जैसे ह्योल्मो, थकाली, जिरेल, नेस्यांग्वा, भोटे, दुरा, लेप्चा आदि भी इस त्यौहार को अपनी शैली और परंपराओं के अनुसार मनाते आ रहे हैं।

