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नेपालगंज में 194 पत्रकारों की आँखों की हुई निःशुल्क जांच, 91 को चश्मा और दवाइयाँ वितरित

 

नेपालगंज/(बाँके) पवन जायसवाल । नेपालगंज में “गौरव स्मृति तथा बी योर सेल्फ फाउंडेशन” के तत्वावधान में तथा नेपाल पत्रकार महासंघ बाँके शाखा के सहयोग से अषाढ़ १ गते (१६ जून २०२५, रविवार) को पत्रकारों के लिए निःशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें कुल १९४ पत्रकारों की आँखों की जांच की गई। इस अवसर पर ९१ पत्रकारों को निःशुल्क चश्मा और आवश्यक औषधियाँ भी वितरित की गईं।

यह कार्यक्रम स्व. गौरव शाह की स्मृति में आयोजित किया गया था, जिनकी मृत्यु चार वर्ष पहले अषाढ़ १ गते को हुई थी। कार्यक्रम का उद्घाटन गौरव स्मृति तथा बी योर सेल्फ फाउंडेशन के अध्यक्ष मधु शाह की अध्यक्षता में तथा नेपाल पत्रकार महासंघ बाँके के अध्यक्ष नवीन गिरी की प्रमुख आतिथ्य में हुआ।

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इस अवसर पर अध्यक्ष नवीन गिरी ने कहा कि पत्रकार आजकल अधिकतर समय कंप्यूटर, लैपटॉप और मोबाइल पर बिताते हैं, जिससे आँखों पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि आँखें मानव शरीर का अति संवेदनशील और महत्वपूर्ण अंग हैं, जिनकी समय-समय पर जाँच अनिवार्य होनी चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन संस्था के सलाहकार तथा पत्रकार मधु पौडेल ने किया। इस अवसर पर नेपाल प्रेस यूनियन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रेम केसी, बास नेपाल के केन्द्रीय अध्यक्ष एवं रेडक्रॉस सोसाइटी पुरैनी उप-शाखा के अध्यक्ष शिवकुमार वर्मा, समाजसेवी हरीश गुप्ता सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने स्व. गौरव शाह की स्मृति में उनके द्वारा स्थापित संस्था की सराहना की।

संस्था के संरक्षक प्रदीप शाह ने जानकारी दी कि संस्था विगत से ही सामाजिक और मानवीय कार्यों में सक्रिय रही है। उन्होंने बताया कि पत्रकारों की आँखों की जांच के लिए ऐसा वातावरण बनाना उनके लिए संतोष और प्रेरणा का विषय है।

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नेपालगंज उपमहानगरपालिका वार्ड नं.–५ में स्थित गौरव स्मृति तथा बी योर सेल्फ फाउंडेशन के कार्यालय परिसर में आयोजित इस शिविर में नेत्र विशेषज्ञ डॉ. तिलक शाह और डॉ. नवीन कनौजिया के नेतृत्व में पुष्पा यादव, विदिशा अग्रवाल, संगीता ओली, करुणा चन्द समेत अन्य सहयोगियों ने सेवाएँ प्रदान कीं।

परीक्षण में यह बातें आईं सामने:

  • कुल १९४ में से ४२% पत्रकारों में दूरदृष्टि (दूर से न देख पाने) की समस्या पाई गई।
  • ५ पत्रकारों में मोतियाबिंद की समस्या देखी गई।
  • ६ पत्रकारों को रंग पहचानने में दिक्कत पाई गई।
  • ८ पत्रकारों में आँखों की लाली और खुजली जैसी वायरल समस्याएँ पाई गईं।
  • ४०% पत्रकारों में आँखों में सूखापन की शिकायत पाई गई, जिनमें से कई को औषधि दी गई।
  • ४० वर्ष से अधिक उम्र के ९ पत्रकारों में पास की नजर की कमजोरी पाई गई।
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नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार दो घंटे से अधिक समय तक लगातार स्क्रीन पर काम करने वाले पत्रकारों में आँखों की समस्याएँ गंभीर हो सकती हैं और समय रहते जाँच और इलाज न होने पर दृष्टि पर गंभीर असर पड़ सकता है।

कार्यक्रम में समाजसेवी माधवराम वर्मा, जिन्होंने संस्था को भूमि प्रदान की थी, ने भी सहभागिता दर्ज कराई।

संस्था के पदाधिकारियों की सक्रिय उपस्थिति में संपन्न यह कार्यक्रम पत्रकारों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण बना।

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