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सानेपा में कांग्रेस का महाभारत : शेखर बनाम विनोद, गगन बनाम मोहन

 

उपशीर्षक: नेपाली कांग्रेस की केन्द्रीय समिति की बैठक आरोप-प्रत्यारोप, गुटबंदी और व्यक्तिगत हमलों का अखाड़ा बन गई

फ़ोटो साभार रातोपाटी

 

काठमांडू, 5 जुलाई 2025| सत्तारूढ़ नेपाली कांग्रेस की केन्द्रीय कार्यसमिति की बैठक इस सप्ताह सानेपा स्थित पार्टी मुख्यालय में राजनीतिक शालीनता से अधिक गुटीय शक्ति प्रदर्शन और आपसी टकराव की वजह से सुर्खियों में रही। बैठक में डॉ. शेखर कोइराला और उद्योगपति विनोद चौधरी के बीच आरोप–प्रत्यारोप और महामन्त्री गगन थापा व मोहन बस्नेत के बीच गम्भीर तकरार मुख्य विषय बने रहे।

शेखर बनाम विनोद : पुरानी रंजिशों का ताज़ा विस्फोट

बैठक के पहले दिन डॉ. शेखर कोइराला ने एक लिखित बयान में विनोद चौधरी की केन्द्रीय सदस्यता पर प्रश्न उठाया। उन्होंने चौधरी की ‘क्रियाशीलता अवधि’ पर सवाल खड़ा करते हुए यह आरोप लगाया कि पार्टी नियमों की अनदेखी कर उन्हें समिति में लाया गया। शेखर ने गिरिजाप्रसाद कोइराला के समय का उदाहरण देते हुए कहा, “सिर्फ इच्छा रखने से कोई योग्य नहीं बनता।”

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जवाब में विनोद चौधरी ने न केवल नियमों का हवाला देकर अपने चयन को जायज़ ठहराया, बल्कि शेखर पर पार्टी उम्मीदवार को हराने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “लुम्बिनी प्रदेश के महामन्त्री को साथ लेकर शेखरजी ने हृदयेश त्रिपाठी के पक्ष में बुथ स्तर पर प्रचार किया।” चौधरी ने यहां तक मांग कर डाली कि शेखर के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

गगन बनाम मोहन : टेरामक्स घोटाले की गूंज

बैठक के दौरान एक और तीखा मोर्चा महामन्त्री गगन थापा और केन्द्रीय सदस्य मोहन बस्नेत के बीच खुला। बस्नेत ने गगन पर आरोप लगाया कि उन्होंने टेरामक्स प्रकरण में संसद में उन पर हमला बोलकर अख्तियार आयोग को उनके पीछे लगाने का काम किया। उन्होंने कहा, “नेपाल अब पाकिस्तान मोडलमा गएको छ – एक-दूसरे को नष्ट करने के लिए।”

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गगन थापा ने संयमित लेकिन तीखा जवाब देते हुए कहा, “मैं फोहोर चलाकर फोहोरी नहीं बनना चाहता।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बैठक में हिंसात्मक भाषा और धमकियों के प्रयोग से पार्टी का माहौल दूषित किया जा रहा है। थापा ने सभापति शेरबहादुर देउवा को सम्बोधित करते हुए चेतावनी दी कि इस तरह की अराजनीतिक प्रवृत्ति को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

समर्थन और विरोध : कांग्रेस में गुटीय लामबन्दी

दोनों विवादों को लेकर पार्टी भीतर समर्थन और विरोध के सुर उभर आए हैं। शेखर कोइराला के पक्ष में दिनेश कोइराला और केदार कार्की जैसे नेता सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर मुखर हुए। दिनेश ने कहा, “अगर शेखरजी संकीर्ण सोच के होते, तो उन्हें ४० प्रतिशत मत नहीं मिलते।”

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वहीं, मोहन बस्नेत की कथित धमकीपूर्ण भाषा की निंदा करते हुए अजयबाबु सिवाकोटी ने पूछा, “क्या राजनीति सिर्फ ताकतवर लोगों के लिए है? क्या दुबले-पतले और शालीन कार्यकर्ताओं को पार्टी से बाहर कर देना चाहिए?” दूसरी ओर, केन्द्रीय सदस्य नागिना यादव ने मोहन बस्नेत के समर्थन में उन्हें ‘अन्याय का शिकार’ बताया।

आत्ममंथन या आत्मविनाश?

कांग्रेस की यह बैठक आत्ममंथन का अवसर थी, लेकिन वह आत्मविनाश की दिशा में बढ़ती दिख रही है। एक ओर युवा नेतृत्व राजनीतिक शुद्धता और पारदर्शिता की बात करता है, दूसरी ओर पुराने चेहरे गुटीय राजनीति और व्यक्तिगत हमलों में उलझे हैं। देखना यह है कि शेरबहादुर देउवा इन दरारों को कैसे पाटते हैं या यह महाभारत पार्टी के भविष्य को और विभाजित कर देगा। स्रोत-रातोपाटी

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