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नेपाल–चीन सम्बन्ध के 70 वर्ष : ललितपुर में सेमिनार सम्पन्न

 

ललितपुर, 21 अगस्त – नेपाल अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग तथा संलग्नता संस्थान (Nepal Institute for International Cooperation and Engagement) ने बुधवार को ललितपुर में “नेपाल–चीन सम्बन्ध के 70 वर्ष” विषय पर विशेष सेमिनार आयोजित किया।

कार्यक्रम में चीन के सिचुआन विश्वविद्यालय, दक्षिण एशिया अध्ययन संस्थान, नेपाल अध्ययन केन्द्र के निदेशक डा. हुआंग झेंगदौ तथा उप–निदेशक डा. गाओ लियाङ मुख्य वक्ता रहे। सत्र की अध्यक्षता अन्तर्राष्ट्रीय सम्बन्ध विशेषज्ञ तथा पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान केन्द्रीय विभाग की प्रमुख डा. लीला न्यौपाने ने की।

अपने विचार प्रस्तुत करते हुए डा. हुआंग झेंगदौ ने कहा कि हाल के वर्षों में चीन–नेपाल सीमापार व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव के अन्तर्गत आधारभूत संरचना और सहयोग परियोजनाओं को मजबूत करने पर बल दिया। हालांकि, उन्होंने लम्बे समय से बने हुए व्यापार असंतुलन को प्रमुख चुनौती बताते हुए कहा कि नेपाल के सतत विकास के लिए स्थानीय उद्यमों के साथ सहकार्य बढ़ाना आवश्यक है।

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उन्होंने चीन–नेपाल मैत्री औद्योगिक पार्क परियोजना का जिक्र करते हुए बताया कि इस परियोजना से लगभग 1 लाख रोजगार सृजित करने की परिकल्पना की गई थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण तथा स्थानीय असहमति के कारण यह अब तक आगे नहीं बढ़ पाई है।

डा. गाओ लियाङ ने नेपाल–चीन सहयोग में सुरक्षा, पर्यावरण तथा क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को प्रमुख चुनौती बताया। उनका कहना था कि नेपाल केवल सुरक्षा दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास और सम्पर्क विस्तार की दृष्टि से भी चीन के लिए रणनीतिक महत्व रखता है। उन्होंने जलविद्युत व्यापार का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे नेपाल को आय सृजना में मदद मिलेगी और ऊर्जा सहयोग को और प्रोत्साहन मिलेगा।

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हाल ही में भारत–चीन के बीच लिपुलेख नाका से व्यापार सम्बन्धी समझौते पर उठे प्रश्न के बारे में डा. गाओ ने स्पष्ट किया कि चीन की इसमें कोई प्रत्यक्ष संलग्नता नहीं है। यह विषय नेपाल और भारत के बीच संवाद से ही सुलझना चाहिए।

कार्यक्रम के अन्त में डा. गाओ ने शुभकामना व्यक्त करते हुए कहा –
“चीन–नेपाल मित्रता दीर्घजीवी हो।”

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