Wed. May 20th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

जेन जी आन्दोलन – नेपाल की राजनीति में नई दिशा या प्रतिक्रान्ति का खतरा ?: केशव झा

 

काठमांडू, २५ भाद्र २०८२। राष्ट्रिय मुक्ति पार्टी नेपाल केन्द्रीय महासचिव केशव झा ने जारी वक्तव्य में हाल ही सम्पन्न जेन जी आन्दोलन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि यह आन्दोलन नेपाल के एकतंत्रीय, केंद्रीकृत और एकाधिकारवादी शासनशैली के खिलाफ़ राष्ट्रीय मुक्ति की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।

झा का कहना है कि नेपाल की वर्तमान राज्यव्यवस्था पुरातन, औपनिवेशिक और एकल नस्लीय चरित्र पर आधारित है, जिसके कारण देश की संस्कृति, सभ्यता, दर्शन और पहचान निरंतर क्षीण होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक राज्यसत्ता एक ही समुदाय तक सीमित रही है, जबकि नेपाल की विविधता—आदिवासी जनजाति, मधेशी, खस-आर्य, नेवार, तामांग, लिम्बू, मुस्लिम, शेर्पा, किरात–राई, गुरुङ, मगर, थारू, दलित और महिलाएँ—राज्य के निर्णयकारी अंगों से वंचित रही हैं।

यह भी पढें   श्रम संस्कृति दवारा पर्चा दिखाते हुए संसद में प्रदर्शन

वक्तव्य के अनुसार, २३–२४ भाद्र को सम्पन्न जेन जी आन्दोलन में पार्टी ने निःस्वार्थ भाव से समर्थन दिया था। झा ने कहा कि आन्दोलन से कोई राजनीतिक लाभ नहीं चाहा गया, बल्कि इसे राष्ट्रीय मुक्ति आन्दोलन के रूप में देखा गया।

उन्होंने सिंगापुर के राष्ट्रनिर्माण अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि नेपाल भी बहुलराष्ट्रीय राज्य की अवधारणा, समान अवसर और सांस्कृतिक संरक्षण की नीति अपनाए तो तीव्र प्रगति कर सकता है।

यह भी पढें   नेपाल में निर्माण सामग्री की कीमतें १०७ प्रतिशत तक बढ़ी, बड़े संकट से गुजर रहा निर्माण क्षेत्र

वक्तव्य में यह भी स्वीकार किया गया कि आन्दोलन के दौरान कुछ अमर्यादित और विध्वंसकारी घटनाएँ हुईं, जिनकी समीक्षा और जिम्मेदारी तय होना अभी बाकी है। झा ने चेतावनी दी कि यदि पुरानी शैली और पुरानी पीढ़ी को ही पुनः अवसर दिया गया, तो इससे भयानक प्रतिक्रान्ति की सम्भावना बढ़ सकती है और गणतन्त्र, संघीयता तथा समावेशिता जैसी उपलब्धियाँ भी खतरे में पड़ सकती हैं।

अन्त में, झा ने आन्दोलनकारी युवाओं से धैर्यपूर्वक परिस्थिति का सामना करने की अपील करते हुए कहा—

“स्वदेशवाद, बहुलराष्ट्रवाद और सामुदायिक समाजवाद ही नेपाल की मुक्ति का मार्ग है। विचार सहित का विकल्प और विकल्प सहित का विद्रोह ही आगे का रास्ता है।”

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *