फूल लोढे फूलवरिया सीता संग सहेलियां

जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर । सप्ताह व्यापी सीताराम विवाह पंचमी महोत्सव के दुसरे दिन जानकी मंदिर परिसर में अवस्थित विवाह मंडप के फूलवारी में फूलवारी लीला महोत्सव मनाया गया। विश्वामित्र के साथ राम लक्ष्मण राजा जनक के शाही अतिथि शाला में ठहरते हैं। पहले दिन जनकपुरधाम के नगर दर्शन करते हैं। दुसरे दिन गुरू विश्वामित्र से आदेश लेकर राजा जनक के फूलवारी घूमने के लिए जाते हैं।बाग तड़ाग में तरह तरह फलदार वृक्ष, तरह तरह के फूल,लता,फूलो पर मंडराते भंवरा तथा पंख फैलाए तितली को देखकर दोनो भाईयों का मन प्रफुल्लित हो जाता है। वे तरह तरह के फूल को निहारते हैं।
इसी समय सीता अपनी सहेलियों के साथ फूल लोढने के लिए आतीं हैं।सभी सहेलियां आपस में हंसी ढिढोलती करती है।सीता सहेलियों को छोड़कर बाग तड़ाग के के मध्य में फूल लोढने के लिए जाती है तभी उनका नजर राम पर पड़ता है। दोनो का आंख चार हो जाता है। दोनो एक दूसरे को देखने लगता है।जव सहेलियां सीता को नहीं देखता है।वे जव सीता को ढूंढने के लिए जाता है।जव सीता को एक अजनबी युवक को टकटकी लगाए देखती है।सखी उसको शरीर को झकझोर कर ध्यान हटाना चाहती है।तव सीता का ध्यान हटती है तो सखियां हंसती है।सीता लज्जित हो जाती है।इधर राम भी अपना ध्यान हटाते हैं।
गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस के बालकांड,दोहा227में लिखा है।”बागु तडागु बिलोकि प्रभु हरषे बंधु समेत,परम रम्य आराम यहु जो रामहि सुख देत।”
जयपुर से आए राम लीला मंडली के कलाकारो ने राम, लक्ष्मण, सीता तथा उसकी सहेली,माली, पहरेदार का जीवंत भूमिका निभायी।इस फूलवारी लीला कार्यक्रम को हजारो श्रद्धालु ने देखा। जानकी मंदिर के महंत राम तपेश्वर दास वैष्णव उतराधिकारी महंत राम रोशन दास वैष्णव, धनुषा के सीडीओ सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।बाग तड़ाग जनकपुरधाम से 18किलोमीटर दूर बिहार के मधुबनी जिला के हरलाखी प्रखंड के फूलहर गांव में अवस्थित है। यहां बाग तड़ाग का अवशेष मौजूद हैं।

