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कांग्रेस में नई रणनीति: शेखर-शशांक गुट ने गगन थापा के नेतृत्व को स्वीकार किया

 

काठमांडू, वैशाख 6।
और के निकट माने जाने वाले नेताओं ने रविवार को बैठक कर पार्टी की वर्तमान परिस्थितियों पर चर्चा की और के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए पार्टी की व्यापक एकता के पक्ष में खड़े होने का निष्कर्ष निकाला।

यह बैठक काठमांडू के विशालनगर स्थित शेखर कोइराला के संपर्क कार्यालय में आयोजित की गई। हालांकि शेखर कोइराला उस समय विराटनगर में होने के कारण बैठक में स्वयं उपस्थित नहीं थे। बैठक का समन्वय पूर्व उपसभापति ने किया था।

बैठक में पूर्व महामंत्री शशांक कोइराला सहित उनके गुट के कई नेता और सांसद मौजूद थे।

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धनराज गुरूंग ने बताया कि बैठक में सर्वोच्च अदालत के फैसले को स्वीकार करते हुए पार्टी की एकता और मजबूती के लिए आगे बढ़ने पर सहमति बनी।

उन्होंने कहा,
“लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोग न्यायपालिका के फैसले को अस्वीकार नहीं कर सकते। हम लोकतांत्रिक मूल्य और स्वतंत्र न्यायपालिका का सम्मान करते हैं और अदालत के निर्णय को स्वीकार करते हैं।”

बैठक में पूर्व महामंत्री शशांक कोइराला, पूर्व सह-महामंत्री जीवन परियार, बद्री पांडे, नेता मीनेन्द्र रिजाल, दिलेन्द्र प्रसाद बडू, सरिता प्रसाईं, चन्द्रमोहन यादव और सीता थपलिया सहित अन्य नेता भी उपस्थित थे।

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बैठक के निष्कर्ष के अनुसार, सर्वोच्च अदालत द्वारा विशेष महाधिवेशन को मान्यता दिए जाने के बाद गगन थापा के नेतृत्व को स्वीकार कर पार्टी को एकजुट करने की दिशा में काम किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि पिछले पुस में हुए विशेष महाधिवेशन से गगन थापा पार्टी के सभापति बने थे। उस महाधिवेशन में तत्कालीन सभापति तथा शेखर-शशांक पक्ष ने भाग नहीं लिया था। बाद में अदालत ने उस विशेष महाधिवेशन को वैध ठहराया।

धनराज गुरूंग ने यह भी स्पष्ट किया कि वे धुम्बाराही में आयोजित उस बैठक में शामिल नहीं होंगे, जिसे पूर्व उपसभापति पक्ष द्वारा बुलाया गया है।

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पूर्व सह-महामंत्री जीवन परियार ने कहा कि विशेष महाधिवेशन के विषय में पहले पार्टी के भीतर अलग-अलग मत थे, लेकिन अब सर्वोच्च अदालत का फैसला आने के बाद नई परिस्थिति उत्पन्न हो गई है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में पार्टी की एकता, संगठन की मजबूती और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सभी नेताओं को जिम्मेदारी के साथ आगे आना चाहिए।

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