Wed. May 27th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

तिलाठी कुनौली झगड़ा को राष्ट्रीयता से जोड़ना व भारतीय अतिक्रमण कहना मुर्खता है : जयप्रकाश गुप्ता

 

तिलाठी और कुनौली का झगड़ा जनजीविका का झगड़ा है । यह न तो राष्ट्रीय स्वाभिमान का है और न ही अतिक्रमण के विरुद्ध का । इस समस्या का समाधान दोनों देशों की सरकार को मिलकर सुलझाना होगा ।

जयप्रकाश गुप्ता, राजबिराज , १ अगस्त |

सप्तरी सीमावर्ती तिलाठी कुनौली क्षेत्र कुछ समय के लिए तनावग्रस्त रहा कारण था कुनौली की ओर से बर्षा के पानी को रोकने के लिए बनाया जा रहा बाँध । उसी बाँध को तोड़े जाने के क्रम में नेपाली जनता और भारतीय जनता के बीच झड़प हुई । दोनों ओर के कुछ लोग घायउल भी हुए । धायल नेपालियों को फिलहाल नेपाली मीडिया और पत्र पत्रिकाएँ वीर योद्धा के रूप में स्थापित करने में लगे हुए हैं और उनकी वीरता के गीत गाए जा रहे हैं । नेपाली राजनीति में जोर शोर से चर्चा में रहे राष्ट्रीयता शब्द को इस घटना के साथ जोड़कर खूब भजाया जा रहा है । प्रचार किया जा रहा है कि तिलाठी की जनता ने भारतीय अतिक्रमण का विरोध किया है और इसी के विरोध स्वरुप काठमान्डू की सड़कों पर भी भारत विरोधी नारे लगने शुरु हो गए हैं । वास्तव में अगर देखा जाय तो ये सभी सतही बाते हैं । तिलाठी की घटना भारतीय अतिक्रमण नहीं हैं और न ही तिलाठी की जनता ने भारत के साथ लड़ाई लड़ी है । बात चाहे जो भी कर ली जाय रंग चाहे जो भी दे दिया जाय पर कारण सिर्फ जीवन रक्षा है । यह कोई नई बात नहीं है सीमावर्ती जनता सदियों से इस समस्या को भोगती आई है । किन्तु इस बार सप्तरी के पत्रकारों ने इस बात को भजाया क्योंकि वो जानते थे कि इसे अगर राष्ट्रवादिता के साथ सम्बद्ध कर के परोपा जाय तो काठमान्डू के बाजार की मनपसन्द सामग्री परोसी जा सकती है और इसमें वो कामयाब भी हुए ।

यह भी पढें   मधेश प्रदेश में मधेशवादी पार्टी सत्ता से बाहर, कृष्ण प्रसाद यादव बहुमत हासिल किए

jp gupta

समस्या देखा जाय तो कुछ और ही है । अगर समस्या के मूल में नहीं जा सके तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति होती रहेगी । बाढ की समस्या सिर्फ तिलाठी में नहीं है देश के कई भाग इस त्रासदी को भोग रहे हैं ।

सप्तरी में एक प्रसंग की चर्चा होती रहती है । खाडो नदी हर वर्ष सप्तरी के तिलाठी और दक्षिण के कुछ क्षेत्र को हर वर्ष डुबाती है । खाडो की पागल धार तोपा, महादेवा, इनरवा, सखुवा होते हुए तिलाठी को डुबाती हुई कुनौली की ओर बहती है । यह आज की बात नहीं है सदियों से यह होता आया है । नेपाल की ओर से आती इस प्रवल वेग से बचने का उपाय कुनौलीवासी हमेशा से खोजते आए है । और हर वर्ष दसगजा में बाँध बनाते आए हैं । अब इससे बचने के लिए तिलाठी की जनता क्या कर सकती है सवाल यह है ।

t-1

इसके लिए सप्तरी के सिडियो कार्यालय में जिला दैवी प्रकोप उद्धार में एक छोटी रकम होती है । कभी कभी इसमें जिविस भी कुछ रकम बढा दिया करती है । और जब भी वर्षायाम आती है और ये गाँव डुबान में पड़ते है. तो सप्तरी के सिडियो तिलाठी के कुछ लोगों को उस बजट का कुछ रकम शराब और माँस के लिए देते हैं और बने हुए बाँध को तुड़वाने का काम करते हैं । ये लोग बड़ी संख्या में आते हैं खाते पीते हैं और कुनौली के लोगों द्वारा बनाए गए बाँध को रात के किसी वक्त आकर तोड़ने का काम करते हैं । हर एक वर्ष इस विषय पर तनाव होता है । बाढ़ खत्म होने के साथ ही इनके रिशते भी सामान्य हो जाते हैं । किन्तु इस बार इस घटना को राष्ट्रीयता और अतिक्रमण से जोड़कर इसकी तस्वीर ही बदल दी गई है । जिस देवनारायण को हीरो बनाया जा रहा है वो नेपाली काँग्रेस की ओर से सप्तरी जिविस का सदस्य है । हर बार ये बाँध तोड़ने के काम में सरीक होते थे किन्तु इस बार तो इसे हीरो ही बना दिया गया है और सोशल मििडया में इसकी तस्वीर भायरल बनी हुई है । जबकि यह एक संयोग मात्र है ।

यह भी पढें   हिमालयन लिटरेचर फेस्टिवल साहित्यिक आयोजन मात्र नहीं,अंतरराष्ट्रीय संवादस्थल है : श्रीजना भंडारी

इस समस्या को अगर गम्भीरता से देखा जाय तो कुछ बातें स्पष्ट हो सकती हैं—जैसे

१. चूरे भूस्खलन से उत्पन्न प्रतिकूलता ः चूरे में हो रहे निरन्तर भूस्खलन से तराई की नदियाँ सतह से ऊपर उठ गई हैं जिससे उनके जल प्रवाह की दिशा बदल गई है ।

२. चूरे और महाभारत से निकलने वाला खाडो, त्रियुगा, महुली और सुन्दरी नदी अद्र्धचन्द्राकार में पूर्व की ओर से कोशी में मिलती है । ये नदियाँ कोशी बैरेज के पश्चिमी तटबन्ध से होते हुए कोशी में मिलती हैं । इसे रास्ता देने के लिए उक्त बाँध में बिना गेट के पुल और सुलेज गेट बने हुए हैं । अभी कोशी में जाने से पहले ही नदी का प्रवाह रुका हुआ है । इसी तरह कोशी नदी के कारण सुनसरी क ीओर पश्चिमी भाग में बालू का ऊँचा ढेर बना हुआ है । इस अवस्था में सारा पानी दक्षिण क ीओर वैरवा, पोर्ताहा, भारदह, सखुवा, हनुमान नगर, इनरवा और राजविराज, पकरी, तोपा, कट्टी, बर्साइन कोइलाडी होते हुए तिलाठी की ओर जाकर कुनौली की तरफ निकास खोजती है । नदी अपनी राह खुद बना लेती है ।

३. इसके निकास का एक दायित्व भारत सरकार का है । कोशी योजना और कोशी समझौता के अनुसार उक्त नदी के निर्वि३न प्रवाह के देखभाल और सुरक्षा का दायित्व भारत सरकार का है लेकिन वर्षो. से उनके द्वारा यह काम नहीं हुआ है ।

यह भी पढें   महोतरी जिला में डूबकर चार बालिका की मृत्यु

४.दूसरा दायित्व नेपाल सरकार का है किन्तु इसने भी इस पक्ष में कोई काम नहीं किया है न ही कोई एजेण्डा रखा है ।

५. आज जो अवस्था आई है इसकी पुनरावृत्ति ना हो इसके लिए स्थानीय निकाय को भी सचेत होने की आवश्यकता है । जनता की भी जिम्मेदारी है किन्तु इसका निर्वाह भी नहीं हो पाया है । उदाहरण के लिए राजमार्ग से होते हुए भारदह से बरमझिया की ओर जाइए । वहाँ महुली पुल है । इस पुल से १किलोमीटर के भीतर ही नदी का प्रवाह खेती के कारण रुका हुआ है । महुली नदी का पानी कोशी की ओर नहीं जा पाता है । अब बरमझिया से कंचनपुर की ओर जब जाएँगे तो सुन्दरी नदी का पुल पडता है । जहाँ धान की खेती होती है और पश्चिम की ओर बास स्थान है । अब सोचने वाली बात है कि सुन्दरी का पानी कहाँ बहेगा ?

ये गम्भीर विषय है । यथार्थ में अगर इन विषयों पर ध्यान नहीं दिया गया तो अगले वर्ष फिर यही सब होगा । तिलाठी और कुनौली का झगड़ा जनजीविका का झगड़ा है । यह न तो राष्ट्रीय स्वाभिमान का है और न ही अतिक्रमण के विरुद्ध का । इस समस्या का समाधान दोनों देशों की सरकार को मिलकर सुलझाना होगा । ये न कर ऐसे मसलों को राष्ट्रीयता के साथ जोड़कर देखना और अतिक्रमण की बात कहना सिर्फ मुर्खता है । हिन्दी प्रस्तुति : श्वेता दीप्ति

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

You may missed