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एैसी व्यवस्था चाहिए जहाँ बेटी को जन्म देनें में माँ अपसोस ना करें : डाँ.मञ्जली यादव (नारी दिवस विषेश)

 


हिमालिनी डेस्क
काठमांडू, ८ मार्च ।
महिला के वर्तमान अवस्था को अगर देखा जाए तो पहले से ज्यादा परिवर्तन आया हैं । लेकिन एक विकसीत मुल्क और हमारें जैसे मुल्क के महिलाओं अवस्था में आज भी जमिन और आसमान के तरह फर्क हैं ।

दसरें मुल्क में महिला अपनी बलबुतें पर हरेक क्षेत्र में आगें आ चुँकी हैं लेकिन हमारे यहाँ आज भी महिलाओं को रिर्जभेसन की जरुरत पडती हैं । समावेशिता करानें के लिए कोटा देना पडता हैं तब जाके वहाँ पर महिला पहुँच पाती हैं । साफ साफ अर्थो में कहा जाए तो आज भी महिलाओं मे बहुत सारिया खामिंया भी हैं जिसकी बजह से वें खुल्ला प्रतिस्पर्धा में पिछें पड जाती हैं ।

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नेपाल संविधान में महिलाओं के कुछ हक और अधिकारों को सुरक्षित किया हैं साथ हि हरेक क्षेत्र में भी समावेशिता का नियम अपनाया गया हैं जहा महिलाओं की उपस्थिती हो रही हैं । आज के दिन में महिला भी हरेक क्षेत्र में होने के बाद भी संख्या काफी नहीं हैं ।

मुझें लगता हैं कि महिला दिवस मनाना महिलाओं को सम्मान देना, प्रोत्साहित करनें जैसा हैं । लेकिन हमारें यहाँ महिला दिवस मनारहें होतें हैं लेकिन कुछ हिस्सों मे हि सिमट जातें हैं । आज भी गावँ और देहातों में महिलाओं की अवस्था जैसे पहलें थें वैसी हि हैं । कुछ परिवर्तन तो हुवा हैं लेकिन एकदम कम हैं ।

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मुझे लगता हैं कि सिर्फ नारी दिवस के अवसर पर कोई कार्यक्रम करके जिम्मेदारी टल जायें एैसे नहीं होने चाहिए बल्की महिलाओं के अवस्था और सशक्तिकरण के लिए भी कुछ काम करनें की जरुरत हैं । महिलाओं को आगे बढानें के लिए उन्हें सरकार की तरफ से, नागरिक समाज के तरफ से महिला उत्थान और विकास में काम करना चाहिए ।

साथ हि समाज में व्याप्त रहें दहेज प्रथा, पितृसतात्मक सोच, महिला हिंसा लगायत के कुप्रथा, कु–संस्कृति हटाने के सभी को सहयोग करना चाहिए । महिलाओं के हक और अधिकार सुनिश्ति होना चाहिए जिस से किसी भी माँ को बेटी की जन्म देने में कोई अपसोस ना हो ।

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