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नेपालगञ्ज में बहुभाषिक गजल गोष्ठी सम्पन्न

 

पवन जायसवाल, नेपालगञ्ज/(बाँके) बैशाख २३ गते ।
गुल्जारे अदब नेपालगञ्ज की संयोजकत्व में नेपालगंज में बहुभाषिक गजल गोष्ठी सम्पन्न हुई है । कार्यक्रम में नेपाल और भारत (उत्तर प्रदेश) के उर्दू, हिन्दी और अवधी साहित्यकारों ने अपनी–अपनी ओर से गजल वाचन किया ।
प्रतिनिधि सभा सदस्य सर्वत आरा खानम की प्रमुख आतिथ्य में तथा गुल्जारे अदब के अध्यक्ष अब्दुल लतीफ शौक की सभापतित्व में कार्यक्रम हुआ था । कार्यक्रम में फारुक अहमद (आरिफ) की भाषिक (उर्दू भाषा) विकास और सामाजिक योगदान के बारे में गजलकारों ने अपनी जगल में चर्चा की ।
बहुभाषिक गजल गोष्ठी में नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान के प्राज्ञ सदस्य हरिप्रसाद तिमिल्सिना, पूर्व सदस्य सचिव तथा वरिष्ठ कथाकार सनत रेग्मी, अवधी साँस्कृतिक प्रतिष्ठान के अध्यक्ष बिष्णुलाल कुम्हार, अवधी सांस्कृतिक विकास परिषद् के अध्यक्ष तथा अवधी÷हिन्दी साहित्यकार सच्चिदानन्द चौवे, उर्र्दू साहित्यकार सैयद असफाक रसूल हाशमी, नसीम अहमद कादरी, हाँजी शकील अहमद कादरी, हयात नेपाली, जमील अहमद हाशमी, मधई सिंह सरदार, मधुकर मणि आचार्य, गुल्जारे अदब के सचिव मुस्तफा अहसन कुरैशी ने गजल वाचन किया ।

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इसी तरह मित्र राष्ट्र भारत (उत्तर प्रदेश) जिला बहराई से आए अन्जुमन शाहकारे, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष शारीक रब्बानी, बहराइच दरगाह शरीफ के निवासी रईस सिद्दिकी, मेराज शिवपुरी, नानपारा के निवासी गुफरान फारुकी लगायत उर्दू साहित्यकारों ने फारुक अहमद (आरिफ) के ने भी गजल वाचन किया । प्रायः सभी गजलकारों ने अपने गजलों की शेर में फारुक अहम के बारे में चर्चा किया ।
स्वर्गीय फारुक अहमद आरिफ की सुपुत्री तथा प्रतिनिधि सभा सदस्य सर्वत आरा खानम और उनके छोटे बेटा उमेर अहमद सादिक ने अपने पिता जी के भाषिक तथा सामाजिक योगदान के बारे में चर्चा की ।

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