Sat. Jul 18th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

समुद्र मंथन में १४ रत्नाें के साथ पाँच कन्याएँ भी मिली थीं जानिए ये कन्याएँ किन्हें मिली

 

समुद्र मंथन पुराणों में वर्णित एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है जिसमें देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया था। इस मंथन के दौरान जहां एक तरह हलाहल विष निकला तो वहीं दूसरी तरफ अमृत भी निकला। इस मंथन में 5 कन्याओं समेत 14 रत्न भी निकले थे। आइए जानते हैं ये पांच कन्याएं किन-किन को मिलीं…

रंभा

रंभा दक्ष नृत्यांगना थीं इसलिए इन्हें इंद्रलोक भेज दिया गया था। वह सुंदर वस्त्र व आभूषण पहने हुई थीं, उसकी चाल मन को लुभाने वाली थी। रंभा इंद्रलोक में नृत्य से देवी-देवताओं का मनोरंजन करती हैं। एक बार विश्वामित्र की घोर तपस्या से विचलित होकर इंद्र ने रंभा को बुलाकर विश्वामित्र का तप भंग करने के लिए भेजा था।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 17 जुलाई 2026 शुक्रवार शुभसंवत् 2083

लक्ष्मी

समुद्र मंथन के दौरान रत्न के रूप में देवी लक्ष्मी समुद्र से प्रकट हुईं। इनके अवतरण के बाद देव और दानव सभी चाहते थे कि लक्ष्मी उन्हें मिल जाएं। लेकिन देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु का वरण किया।

वारुणी

सुरा अर्थात मदिरा लिए हुए वारुणी देवी समुद्र से प्रकट हुईं। भगवान की अनुमति के बाद इन्हें असुरों को सौंप दिया गया।

तारा

रामायण में कथा मिलती है कि देवराज इंद्र के पुत्र वानरराज बाली ने समुद्रमंथन के दौरान देवताओं को कमजोर पड़ते देख उनकी सहायता करने लगा। बाली के बल और साहस के प्रसन्न होकर देवराज इंद्र ने उन्हें वरदान दिया कि तुमसे जो भी युद्ध करेगा उसका आधा बल तुम्हें मिल जाएगा। साथ ही देवताओं ने सागर मंथन में सहयोग के मंथन से उत्पन्न अप्सरा तारा के साथ बाली का विवाह करा दिया।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक: 16 जुलाई 2026 गुरुवार शुभसंवत् 2083

रूमी

वानरराज बाली का भाई तथा सूर्य पुत्र सुग्रीव को भी समुद्र मंथन से निकली अप्सराओं में से एक अप्सरा रूमी पत्नी स्वरूप मिली। जिस पर एक समय बाली ने अधिकार कर लिया था। अपनी पत्नी को मुक्त कराने के लिए और अपना सम्मान पाने के लिए ही सुग्रीव ने भगवान राम से मित्रता की थी।

स्राेत नवभारत टाइम्स

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *