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समुद्र मंथन में १४ रत्नाें के साथ पाँच कन्याएँ भी मिली थीं जानिए ये कन्याएँ किन्हें मिली

 

समुद्र मंथन पुराणों में वर्णित एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है जिसमें देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र का मंथन किया था। इस मंथन के दौरान जहां एक तरह हलाहल विष निकला तो वहीं दूसरी तरफ अमृत भी निकला। इस मंथन में 5 कन्याओं समेत 14 रत्न भी निकले थे। आइए जानते हैं ये पांच कन्याएं किन-किन को मिलीं…

रंभा

रंभा दक्ष नृत्यांगना थीं इसलिए इन्हें इंद्रलोक भेज दिया गया था। वह सुंदर वस्त्र व आभूषण पहने हुई थीं, उसकी चाल मन को लुभाने वाली थी। रंभा इंद्रलोक में नृत्य से देवी-देवताओं का मनोरंजन करती हैं। एक बार विश्वामित्र की घोर तपस्या से विचलित होकर इंद्र ने रंभा को बुलाकर विश्वामित्र का तप भंग करने के लिए भेजा था।

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लक्ष्मी

समुद्र मंथन के दौरान रत्न के रूप में देवी लक्ष्मी समुद्र से प्रकट हुईं। इनके अवतरण के बाद देव और दानव सभी चाहते थे कि लक्ष्मी उन्हें मिल जाएं। लेकिन देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु का वरण किया।

वारुणी

सुरा अर्थात मदिरा लिए हुए वारुणी देवी समुद्र से प्रकट हुईं। भगवान की अनुमति के बाद इन्हें असुरों को सौंप दिया गया।

तारा

रामायण में कथा मिलती है कि देवराज इंद्र के पुत्र वानरराज बाली ने समुद्रमंथन के दौरान देवताओं को कमजोर पड़ते देख उनकी सहायता करने लगा। बाली के बल और साहस के प्रसन्न होकर देवराज इंद्र ने उन्हें वरदान दिया कि तुमसे जो भी युद्ध करेगा उसका आधा बल तुम्हें मिल जाएगा। साथ ही देवताओं ने सागर मंथन में सहयोग के मंथन से उत्पन्न अप्सरा तारा के साथ बाली का विवाह करा दिया।

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रूमी

वानरराज बाली का भाई तथा सूर्य पुत्र सुग्रीव को भी समुद्र मंथन से निकली अप्सराओं में से एक अप्सरा रूमी पत्नी स्वरूप मिली। जिस पर एक समय बाली ने अधिकार कर लिया था। अपनी पत्नी को मुक्त कराने के लिए और अपना सम्मान पाने के लिए ही सुग्रीव ने भगवान राम से मित्रता की थी।

स्राेत नवभारत टाइम्स

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