सोचता हूं कि उस की याद आख़िर अब किसे रात भर जगाती है :जौन एलिया
जौन एलिया के अशआर
ये मुझे चैन क्यूं नहीं पड़ता
एक ही शख़्स था जहान में क्या
बहुत नज़दीक आती जा रही हो
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
जाने वाले यहां के थे ही नहीं
कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूं मैं
क्या सितम है कि हम लोग मर जाएंगे
ग़ौर करने पे याद आती है
सोचता हूं कि उस की याद आख़िर
अब किसे रात भर जगाती है
मैं दिल किसी से लगा लूं अगर इजाज़त हो
तुम्हारा हिज्र मना लूं अगर इजाज़त हो
मैं दिल किसी से लगा लूं अगर इजाज़त हो
क्या मिरी नींद भी तुम्हारी है
इक अजब हाल है कि अब उस को
याद करना भी बेवफ़ाई है

