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एक पल है जिन्दगी और सौ हैं खयाल, मेरे हर खयाल में एक तेरा खयाल : बसंत चाैधरी

 

जिन्दगी की भाग दाैड में ऊबता मन, जब  बसंत चाैधरी की कविताओं से गुजरता है ताे एक ताजगी महसूस हाेती है । बस कुछ ऐसा जैसे मरुस्थल में पानी का कतरा, या चातक काे ज्याें नसीब हाे ओस की बूँदें ।

एक पल है जिन्दगी और सौ हैं खयाल, मेरे हर खयाल में एक तेरा खयाल, ख्वाबों में बस तू ही रहा है, आज तू मेरा, तू ही कल भी रहा है

1

दिल जलता है
तेरी आरजू के साए में
दर्द मेरा पलता है
यह कैसा प्यार है आँखें नम हैं
क्यों दिल जलता है ?
ख्वाहिश है या है जुनून
दिल को कुछ भी समझ आए ना ।

चाहा तुझे, सोचा तुझे
जज्बात की हर शाख पर
खुशबू से लिखा तुझे
ओ बेखबर तूने मगर
अपना न समझा मुझे
दिलबर तेरी यह बेखुदी
जान कहीं मेरी ले जाए ना ।

चाह तेरी आस तेरी
दिल से निकल पाए ना
ये रोशनी, ये चाँदनी
ये चाँद ढल जाए ना
हर पल जियूँ साथ तेरे
पर जाने क्यों मेरी तड़प
एक तू ही समझ पाए ना ।

2
करवटों के पल
करवटों के पल भूले थे जो कल
याद आज वो आ रहे
सिहरन साँसों में, चेहरे पे मेरे
मुस्कान कितनी ला रहे
तुम्हारी महक मेरे आसपास
धुँधली झलक बस तुम्हारी खास

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दिल के करीब ला रहे ।
तुम्हारे मेरे दरमियाँ जो थीं
जाने कितनी दास्तानें
जो परछाइयों में मिली थीं
फिर ले आई मुझको वहाँ
तुम थे, मैं था, अपना जहाँ
तुम्हारी महक मेरे आसपास
धुँधली झलक बस तुम्हारी खास
दिल के करीब ला रहे ।

मेरे सपनों में आते रहे
यादें तुम्हारी दिलाते रहे
मुझको तुमसे मिलाते रहे
तुम्हारी महक मेरे आसपास
धुँधली झलक बस तुम्हारी खास
दिल के करीब ला रहे ।

3
बावरी मोरी बिंदिया
बाबरी मोरी ये बिंदिया
रूठे, करे न श्र्ंगार रे
साँवरे पैरों की ये पायलिया
तोरा करे इन्तजार रे
चूड़ी खनके तो तनहा मन मोरा
पिया मिलन बेकरार रे
जिया बेकरार करे इंतजार ।

तोसे जो न हों बतियाँ
सोएँ ना मोरी अँखियाँ
झुमका मोरा झूमें नही. अब
गालों को मेरे चूमे नही. अब
पूछे मुझसे है, पिया कहाँ हैं तेरे
जिया खोया कहाँ रे
जिया बेकरार करे इंतजार ।
तू क्या जाने पिया रे
मोरी पीर यह दिल की
विरहन बन के दर–दर धूमूँ
मीरा जैसे मोहन ढूँढे
आ भी जा अब राह देखू तेरी
बैठी नैना बिछाए रे
जिया बेकरार करे इन्तजार

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4
तू परी या तू खुदा
एक तुझमें सब है मिला
मेरा होश तू ले चला
फूलों का रंग, सुबह की धूप
सर्दी की ओस, बादल का रूप
सब–सी तू है, पर है जुदा
या तू परी या तू खुदा ।

कोई जादू है तू या
कोई नशा–सा क्या पता
तू ही आती नजर है
देखूँ जिधर भी क्यों बता
शबनम जैसे चाँदनी में
ऐसी तू क्यों हूर है
जन्नत का जैसे ख्वाब तू
देखूँ तुझे जरूर मैं
या तू परी या तू खुदा ।

मेरे दिल की जमीन ये
जैसे थमी हो तेरे बिना
हर पल कोइृ कमी हो
जब तू नही. हो जीना गुनाह
सूरज की उजली किरण तू
ठंडी–सी तू सहर
तू ही तो राह है मेरी
तू ही तो रहगुजर
या तू परी या तू खुदा ।

5
एक पल जिन्दगी…
एक पल है जिन्दगी और सौ हैं खयाल
मेरे हर खयाल में एक तेरा खयाल
ख्वाबों में बस तू ही रहा है
आज तू मेरा, तू ही कल भी रहा है
मुझमें था, मुझमें है, तू बेहिसाब
तेरा खयाल, बस तेरा खयाल ।

अभी–अभी जो पल मिले, हम दोनों उनमें जिएँ
खोए–खोए दुनिया से हम, आज बस हम तेरी सुनें
कल फिर ना आएगा, आज अपना ये सनम
बहे जा मुझमें आज, तोड़ दे हर कसम
आ जा इतने करीब, हो न ये फासला
मुझमें था, मुझमें है, तू बेहिसाब
तेरा खयाल, बस तेरा खयाल ।

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दिल–दिल से लगाने की, हैं मेरी हसरतें
धड़कनों को मेरी है, तेरी–तेरी जरूरतें
मेरी निगाहों में बस तेरी बाहों में
तेरी पनाहों में, मेरे–मेरे दो जहाँ
जाऊँ मैं अब कहाँ, तू जहाँ मैं वहाँ
मुझमें था, मुझमें है, तू बेहिसाब
तेरा खयाल, बस तेरा खयाल ।

चाँद तू थम जरा

यूँ ही कभी राहों में वो मिले जरा
यूँ ही कभी सरगोशियों से कहे वो जरा
कभी तू भी आ के अपनी जमीन पे ठहर
कर दे फिजाओं को तू नम जरा
ऐ चाँद तू थम जरा

थोड़ा–थोड़ा होना बेखबर
तुझसे जब वो मिलाए नजर
कह देना बहका–बहका तू भी उसे देखकर
आशिक तू भी हो जरा
ऐ चाँद तू थम जरा ।

कोई नशा–सा हवाओं में भर
जागे सितारों को नींदों से भर
चेहरा उसका रोशन फिर कर देना चाहे
जग की चाँदनी कम जरा
ऐ चाँद तू थम जरा ।

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