कोरोना को देखाकर बढ़ती काला बाजारी
चीन से प्रारम्भ कोरोना वायरस का संक्रमण विश्व भर फैल चूका है, परन्तु नेपाल में आज के दिन तक संक्रमित नहीं मिलने के बाबजुद भी समाज प्रभावित हो गया है । सरकार द्वारा ५ गते चैत्र से विद्यालय बन्द का आह्वान किया गया है । साथ ही अन्य कार्यालयों को भी हल्का रखने के लिए अनुरोध किया गया है । ताकी भीड़–भाड़ कम हो तो कोरोना वायरस फैलने का वजह कुछ कम हो जाय । इसी प्रकार सवारी साधन में भी कुछ कमी करने की बात की जा रही है । विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर आवत–जावत के लिए भी प्रतिबन्ध लगाया जा रहा है ।
इसी विषयों को ध्यान में रखते हुये सर्वसाधारण बजार से अनावश्यक खाद्यान्न तथा आवश्यकीय सामाग्री इकट्ठा करने में जुट गये हैं । फलश्वरुप कृत्रिम आभाव सृजना होने लगा है । अगर एक ही व्यक्ति कोई वस्तु बहुत सारा खरीद लें तो स्वाभाविक है, वही वस्तु दूसरे, तीसरे व अन्य व्यक्ति के लिये कम पर सकता है । तो दूकानदार भी चौकन्ना होकर अवसर का फायदा उठायेगा ही ।
सरकार बार–बार कह रही है कि जनता को उपभोग्य की वस्तु का आभाव नहीं होने देंगे । फिर भी विभिन्न अफवाह के कारण जनमानस में त्रास फैला हुआ है । एक तो कोरोना वायरस जैसा महामारी का डर, साथ में खाद्यान्न का आभाव, ना बाबा ना । बहुत बार नेपाली जनता इस संकट का सामना कर चुकी है । कहावत है कि दुध से जली बिल्ली छांछ भी फूंक फूंक कर पीती है ।
कहा जाता है कि कोरोना वायरस से बचने के लिये सर्वसाधारण को भी ‘होम क्वारेन्टाइन’ में रहने का नौवत आ सकता है । इसलिये लोग अत्यधिक खाद्यान्न तथा आवश्यकीय वस्तु भण्डारण करने में लोग लगे हुये है । जिसको देखकर हम लोग कह सकते हैं कि लोग अपने आप से काला–बजारी को आमन्त्रण करने में लगे हुये हैं ।
विभिन्न स्थानों पर कोरोना के वहाने कालावजारी बढ़ गया है । इसका नियन्त्रण करना सरकार का दायित्व है । उन्हें विभिन्न जनचेतना कार्यक्रम के माध्यम से जनमानस मे फैला त्रास तथा अस्थिरता को कम करना चाहिये । कालाबजारी नियन्त्रण के लिए सरकार द्वारा प्रभावकारी रुप में अनुगमन, नियन्त्रण और नियमन का काम किया जाना चाहिए । उक्त कार्य में निजी क्षेत्र के संघ–संस्थाओं का भी संलग्नता होनी चाहिये ।
जनता को भी बस सचेत होने की आवश्यक्ता है त्रसित होने की नहीं ।

