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रसुवागढी और तातोपानी नाका कितनी सुरक्षित : श्वेता दीप्ति

 

डा.श्वेता दीप्ति, २६ मार्च २०२०| एक सप्ताह पहले सरकार ने चीन और भारत के सभी नाकाओं को बंद करने का एलान किया था साथ ही लॉकडाउन की भी घोषणा की । किन्तु लॉकडाउन की अवहेलना करते हुए आज भी लोग दिख रहे हैं और संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है । पिछले दो महीनों से सरकारी स्तर पर जो तैयारी होनी चाहिए थी, वो न्युन रही और आज जब कोरोना ने नेपाल की जमीन पर दस्तक दे दी है और असर भी दिखने लगा है तब हमारे चिकित्सिक बिना किसी तैयारी के मरीजों की देखभाल कर रहे हैं । भारतीय नाका पर जाँच की जो प्रक्रिया होनी चाहिए थी वो सिर्फ दिखावा भर रहा । भारत से वापस आए नेपाली नागरिक बिना किसी जाँच के गाँव–गाँव में जा चुके हैं । पड़ोसी देश भारत इस जोखिम से जूझ रहा है स्थिति गम्भीर बनी हुई है । ऐसे में जो वहाँ से नेपाल वापस आए हैं उनसे कितना खतरा हमें है यह जाहिर तौर पर हम समझ सकते हैं । एयरपोर्ट की व्यवस्था भी महीनों से कामचलाऊ ही रही है ।

 

ऐसे में अचानक सरकार ने निर्णय किया है कि चीन से जुड़ी सीमा रसुवागढी और तातो पानी को खोला जाएगा । क्योंकि स्वास्थ्य सामग्री चीन भेज रहा है । यह सही है कि आज इन सामग्रियों की आवश्यकता है क्योंकि यहाँ के हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं । किन्तु यह व्यवस्था पहले क्यों नहीं की गई आखिर सरकार इतनी निश्चिंत क्यों थी ? डॉक्टर, नर्स, प्रहरी की जान की सुरक्षा दाँव पर लगी हुई है । क्या इस स्थिति के लिए पहले से सतर्कता की आवश्यकता नहीं थी ?

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जहाँ तक चीन का सवाल है तो वह आज स्वयं सवालों के कटघरे में है । जहाँ की मीडिया सरकार की है और वहाँ की कोई खबर विश्व तक सही पहुँचने की सम्भावना नजर नहीं आ रही । हम वही जान रहे हैं जो वह बता रहा है । जबकि अब तो वहाँ हुई मौत का आँकड़ा भी सवालों के घेरे में है ।

 

कई मीडिया ने यह दावा किया है कि चीन सरकार के कुछ दस्तावेज मीडिया में लीक हो गए हैं और ये दस्तावेज सरकार के दावे से अलग कहानी कहते हैं । इस वक्त दुनिया में कोरोना वायरस से पीडि़त लोगों की संख्या 4,71,581 पार कर गई है, वहीं मृतकों की संख्या 21000  से अधिक हो चुकी है । इससे कोरोना वायरस के कहर का अंदाजा लगाया जा सकता है । चीन ने कहा था कि कोरोना वायरस की शुरुआत वुहान से हुई । लेकिन चीनी अधिकारी ने 7 जनवरी को ये जानकारी दी थी उन्होंने मरीजों में नए वायरस के संक्रमण का पता लगाया है । सरकार ने कहा था कि संक्रमण का पहला मरीज एक महीने पहले 7 दिसंबर को बीमार पड़ा था ।

 

लेकिन क्या यह सच है ? या चीन दुनिया के सामने सच्चाई नहीं ला रहा है ? साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट को एक क्लासिफाइड डाक्यूमेंट हाथ लगा है । मीडिया में लीक हुआ ये सरकारी दस्तावेज चीन के दावे से अलग कहानी पेश करता है । सरकार का जो दस्तावेज लीक हुआ है उससे पता चलता है कि कोरोना वायरस का एक मरीज 17 नवंबर 2019  को ही ट्रेस कर लिया गया था । चीन के हुबेई प्रोविन्स में यह मरीज मिला था । वुहान हुबेई की राजधानी है । डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, लीक दस्तावेज इस बात की ओर इशारा करते हैं कि 17 नवंबर को कोरोना वायरस मरीज को ट्रेस करने के करीब 2 महीने बाद चीन ने वुहान सहित कई शहरों में बड़ी कार्रवाई की थी और प्रतिबंध लगाए । रिपोर्ट के मुताबिक, हुबेई में रहने वाले 55 साल के शख्स के अंदर 17 नवंबर को कोरोना वायरस का संक्रमण मिला था । रिपोर्ट में बताया है कि इसके बाद से हर दिन एक से 5 नए मामले सामने आने लगे. आधिकारिक तौर से चीन का दावा है कि कोरोना वायरस का पहला मरीज 7 दिसंबर को मिला था । हालांकि, बड़े पैमाने पर एक्शन कई हफ्ते बाद लिए गए थे । वहीं, लीक दस्तावेज में इस बात की भी जानकारी मिलती है कि 31 दिसंबर से पहले तक सरकारी अधिकारियों ने कोरोना वायरस से संक्रमित 266 लोगों की पहचान कर ली थी ।

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हम सब यह भी जानते हैं कि जिस डाक्टर ने पहली बार इस संक्रमण की बात कही थी उसकी आवाज दबा दी गई और बाद में उस डाक्टर की इसी वायरस की वजह से मौत हो गई । कहने का तात्पर्य यह है कि ऐसे में हम कितना यकीन कर सकते हैं कि वहाँ सब कुछ सही है ।

पिछले कई सप्ताह से यह कहा जा रहा है कि चीन के हालात सुधर गए हैं और कई तस्वीरें दिखाई जा रही हैं जिसमें बुहान से स्वास्थ्यकर्मी वापस आ रहे हैं । बावजूद इसके कुछ एक केस अब भी सामने आ रहे हैं । एक सवाल यह भी सामने आता है कि चीन में यह वायरस बुहान तक ही सीमित रहा अर्थात् चीन तैयारी कर चुका था इससे निपटने का किन्तु दुनिया को इसकी भयावहता की खबर बाद में लगी । तीन महीने से यह चर्चा में है किन्तु हमारे हवाई अड्डे पर इसकी गम्भीरता को नहीं समझा गया । ऐसे में चीन के नाका को खोलने से पहले सरकार से यह उम्मीद करें कि वहाँ की सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद हो और पूरी सतर्कता अपनाई जाए । वैसे हम यह भी जानते हैं कि उन सीमाओं पर हम ही कमजोर पड़ जाते हैं क्योंकि वहाँ उनकी चलती है हमारी नहीं । हालात ये है कि देश को स्वास्थ्य सम्बन्धी सामानों की आवश्यकता है पर देखना यह है कि सरकार इन सामानों को कैसे और कितनी सुरक्षित तरीके से सीमा से लाती है ।

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