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ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मॉरिसन ने चीन के सीफूड बाजार के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की

 

मेलबर्न, प्रेट्र।

जानलेवा कोरोना वायरस का कारण बने चीन के सी-फूड बाजार के खिलाफ दुनिया का गुस्सा अब बढ़ने लगा है। इसकी शुरुआत ऑस्ट्रेलिया से हुई है। वहां के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ और संयुक्त राष्ट्र से चीन के इन बाजारों के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया है।

वुहान के सी-फूड बाजार में बिकने वाले चमगादड़ से वायरस फैला था

काेराेना वायरस के फैलने का कारण माना गया था चमगादड काे क्याेंकि वुहान के सी-फूड बाजार में बिकने वाले चमगादड़ से मनुष्य में वायरस फैलने की बात सामने आई थी। गुरुवार को एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में मॉरिसन ने कहा कि चीन के सी-फूड बाजार एक बहुत बड़ी समस्या हैं।

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यह वायरस चीन से शुरू हुआ और अब पूरी दुनिया में फैल गया

यह वायरस चीन से शुरू हुआ और अब पूरी दुनिया में फैल गया है। लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को इस बारे में कुछ करना चाहिए। शुक्रवार को एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान भी मॉरिसन ने इस तरह की बाजारों पर कार्रवाई की बात कही थी।

विश्व के लिए यह एक बड़ी चुनौती

उन्होंने कहा, ‘मेरा विचार है कि विश्व के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों को इस पर ध्यान देना चाहिए।’

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महामारी से जंग को संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव मंजूर

कोरोना से जंग के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भारत समेत दुनिया के 188 देशों के समर्थन वाले एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया है। इसमें कोरोना वायरस यानी कोविड-19 की महामारी को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग तेज करने का प्रस्ताव किया गया है। कहा गया है कि इस जानलेवा वायरस से ‘समाज और अर्थव्यवस्था को भीषण’ खतरा है।

‘कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक एकजुटता’

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प्रस्ताव का शीर्षक ‘कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक एकजुटता’ है। इस वैश्विक महामारी पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा स्वीकार किया गया यह पहला दस्तावेज है। पूरी दुनिया में इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 10 लाख तक पहुंच गई है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अब तक इस महामारी पर चर्चा नहीं हुई है। इस दस्तावेज में कोरोना वायरस से समाज पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव और अर्थव्यवस्था को पहुंचने वाला नुकसान शामिल है। इसके अलावा इसमें वैश्विक यात्रा और कारोबार के खतरे और लोगों की आजीविका का संकट भी शामिल किया जाएगा।

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