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इक दीप जला आशाओं का, जिससे जगमग ये देश हुआ : कल्याणसिंह शेखावत

 

इक दीप जला

इक दीप जला आशाओं का,
जिससे जगमग ये देश हुआ

नव भाव जगाने अंतस में,
आलस्य न आए तन मन में।
इक ज्योति जली हर गाँव शहर,
उज्ज्वलता भरने जीवन में।।
शंका से झुलसे उपवन में,
शीतलता का परिवेश हुआ।।

है ज्योति पुंज नन्हा दीपक,
है ज्ञान-गुणों का यह द्योतक।
ये तमस भगाने वाला है,
यह आत्म नेह का संवाहक।।
प्रासाद-कुटी दोनों का ही,
ये मिलन नया संदेश हुआ।

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चाहत अँधियारा छँटने की,
इस काल रात के कटने की।
हर इक को हिम्मत करनी है,
यह पल है तम से लड़ने की।।
थक कर सहमे हे मानव सुन,
पूर्वांचल उदय दिनेश हुआ

आँखों में स्वप्न जड़े देखे
सत पथ पर मनुज खड़े देखे।
दीपों की रौशन दुनिया से,
तम के तम्बू उखड़े देखे।
घृत बाती सँग नन्हा सैनिक,
ये दीपक आज सुरेश हुआ।।

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कल्याणसिंह शेखावत, जयपुर

 

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