जरूरत मन्द छूट जाते है और सम्पन्न लोग राहत के लिए लड़ते थे : मुकेश द्विवेदी
बीरगंज, २०७६ चैत्र २७ गते विहिवार।बिरगंज महानगरपालिका ने पिछले एक सप्ताह से वार्डो के अवस्था अनुसार एक लाख से साढे चार लाख तक राहत उप्लब्ध कराने की बात, सब को ज्ञात ही है। सभी वार्ड ने अपने आवश्यकता अनुसार राहत वितरण भी किया।
इस प्रकार सभी वार्ड में वितरित राहत के प्रक्रिया और तरीका के संबंध में आम जन मानस में व्यापक चर्चा-परिचर्चा भी चल रहा है। इसमें किसको राहत देना चाहिए किसको नहीं देना चाहिए, इस संदर्भ में हो रहे टीकाटिप्पणी सर्वविदित है।
इस अवस्था में गरिब-निमुखा, दैनिक कमा कर खाने वाले परिवार को समस्या ना हो, इसलिए केन्द्र और प्रदेश सरकार ने ऐसे परिवार को कम-से-कम दो समय का भोजन का समस्या ना हो, इसके लिए राहत बाटने के लिए कार्यबिधी भी जारी किया था।
उक्त कार्यबिधी में प्रष्ट रूप से उल्लेख था कि, किसको और कैसे राहत दिया जाए। उल्लेख अनुसार सर्वदलीय और सर्बपक्षीय कमिटी बनाकर कम से कम तिस किलो चावल, दो किलो दाल, दो किलो चिनी और हात धोने के लिए चार साबुन देने के लिए स्थानीय सरकार को कार्यबिधी बनाकर भेजा गया था।
सर्वदलीय और सर्वपक्षीय कमिटि बनाकर परिवार का बिबरण तैयार कर महानगर में भेजा गया। महानगर में फर्म को भेरिफाई किया गया, जिन परिवारों को राहत उप्लब्ध कराना था। मेयर साहब ने बताया कि आवेदन अनुसार हरेक वार्ड में छौ सौ से लेकर पंद्रह सौ तक आवेदन आया है। इस तरह ३२ वार्ड में राहत बाटने के लिए करिब दश करोड रुपैया की जरूरत होगी। इतना पैसा महानगर नही लगा सकता।
मेयर साहब के अनुसार वास्तव में यदि फर्म भरने वाले सभी गरिब है, तो खुद कर्जा लेकर भी राहत उपलब्ध कराते लेकिन यहाँ तो प्रतिस्पर्धात्मक हिसाब से अपने-अपने ख़ास लोगो द्वारा आवेदन कराया गया है। इस प्रकार से जो सही रूप में जरूरत मंद है, उनतक राहत पहुच नही पाएगा, इसके लिए बोर्ड़ के बैठक में इस पर चर्चा करेंगे, यही अवस्था रही तो प्रशासन और सेना से मदद लेकर असल जरुरत मंद तक राहत पहुँचाना पड़ेगा।
मैंने महसूस किया कि राहत बाटने के समय गरीब, असहाय और जरूरत मन्द छूट जाते है और सम्पन्न लोग राहत के लिए लड़ते थे, यहां तक कि पैंट, शर्ट, साडी, दो तोला का गहना लगाए लोग सबसे पहले राहत लेने आते है और गरीब पीछे छूट जाते है। ये दुर्भाग्यपूर्ण है, इस महा विपत्ति के समय हमें लोभ-लालच का त्याग करके मानवता दिखाने की जरूरत है।



