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कैसी है ये जंग : निधि भार्गव मानवी

 

कैसी है ये जंग : निधि भार्गव मानवी

सहमी सहमी है फिज़ाएं

ठिठक रहे हैं कदम

ये कैसा ठहराव है

और कैसी है ये जंग?

माना कि वक्त बेदम

हो चला है..और

स्थिति गंभीर..है

पर कभी थमता नहीं

है ये.. चलता रहता है

हिम्मत और हौसलों के

मजबूत कदमों पर

डाल दो वक्त का ये

खोटापन, कभी तो

अनूकूल होगा ये

ये कहावत वर्तमान स्थिति पर स्टीक बैठती है…

कि “डर के आगे ही जीत है”

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धैर्य रखो, दौर है मुश्किलों

का

गुज़र ही जाएगा..

हौसलों के अडिग रास्तों

पर चलकर…

अपनों का हाथ थामें. .

दुआएं होंठों पे सजाकर

खुद से नज़रें मिलाकर

आओ हम सब प्रण करें कि

डरेंगे नहीं,

बस हिम्मत रखेंगे।

निधि भार्गव मानवी
गीता कालोनी
ईस्ट दिल्ली

 

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