आ गई खँडहर में नई जान, शायद पथिक तुम ही थे : इरा ठाकुर
यहाँ एक खँडहर था वीरान, नीरव
जल रही थी दीपशिखा निष्पन्द
अचानक किसी का आगमन
और प्रदीप्त हो उठा कण -कण
शायद पवन तुम ही थे
झँकृत हो उठा नूपुर ध्वनि से
खँडहर अब तक था जो वीरान
आ गई खँडहर में नई जान
शायद पथिक तुम ही थे
चमकी बिजली रो दिया नभ
शायद छुआ किसी ने मर्म
भींग उठा पूरा खँडहर
शायद बादल तुम ही थे
कुछ क्षण में सब हुआ शांत
मृग चपल मन हुआ भयाक्रांत
पुनरावृत्ति का जब हुआ भान
पुनः एकाकी पुनः सूनापन
इरा ठाकुर



आ गई खंड हर मे नई जान बहुत ही उम्दा हार्दिक बधाई