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ओली द्वारा किया गया प्रस्ताव नेता नेपाल द्वारा अस्वीकार, खुद प्रधानमन्त्री बनने की खेल में नेपाल

 

काठमांडू, २९ अप्रील । सत्तारुढ दल नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (नेकपा) के अन्दर जारी राजनीतिक अन्तर द्वन्द्व चरम सीमा पर है । कोरोना महामारी से जूझ रहे संकटपूर्ण घड़ी में अनावश्यक दो अध्यादेश जारी होने के बाद पार्टी के अन्दर और बाहर प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली को आलोचित होना पड़ रहा है । ऐसी ही पृष्ठभूमि में नेकपा के अन्दर से ही प्रधानमन्त्री ओली को पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमन्त्री दोनों पद से हटाने का खेल भी शुरु हो चुका है । लेकिन प्रधानमन्त्री ओली अपनी पोजिसन कायम रखने के लिए क्रियाशील हैं ।
जारी राजनीतिक भागदौड़ के ही दौरान सोमबार प्रधानमन्त्री ओली और वरिष्ठ नेता तथा पूर्व प्रधानमन्त्री मधवकुमार नेपाल पक्षधर बीच भेटभार्ता आयोजन किया गया । उक्त भेटवार्ता में प्रधानमन्त्री ओली ने दो मुख्यमन्त्री और कुछ मन्त्रियों में फेरबदल करने की प्रस्ताव करते हुए नेता नेपाल पक्षधरको अपनी ओर लाने की प्रयास किया था । लेकिन दूसरी ओर नेता नेपाल तथा नेकपा के ही दूसरे अध्यक्ष एवं पूर्व प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड पक्षधरबीच इससे पहले ही सहमति हो चुकी है कि प्रधानमन्त्री ओली को पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमन्त्री दोनों पद से हटाना है ।
नेता नेपाल पक्ष की माने तो अध्यक्ष प्रचण्ड ने नेता नेपाल को प्रधानमन्त्री बनने के लिए प्रस्ताव भी किया है । इधर प्रधानमन्त्री ओली भी नेपाल और प्रचण्ड बीच रहे राजनीतिक समझदारी को तोड़ने के लिए क्रियाशील हैं । उन्होंने पिछली बार नेता नेपाल से प्रस्ताव किया था कि तत्काल दो मुख्यमन्त्री और कुछ मन्त्री लेकर समस्या को समाधान किया जाए । इतना ही नहीं, अग्रीम महाधिवेशन आयोजन कर पार्टी अध्यक्ष नेता नेपाल को हस्तान्तरण करने के लिए भी ओली तैयार हो गए हैं । नेकपा स्रोत का कहना है कि प्रदेश नं. १ के मुख्यमन्त्री शेरधन राई और बागमती प्रदेश के मुख्यमन्त्री डोरमणि पौड्याल को हटाकर उन लोगों की जगह नेता नेपाल पक्षधर नेताओं को मुख्यमन्त्री बनाने के लिए प्रधानमन्त्री ओली तैयार हो गए है । इसीतरह आगामी आश्विन महीने में ही पार्टी महाधिवेशन मार्फत पार्टी अध्यक्ष पद हस्तान्तरण करने का आश्वासन भी नेता ओली ने दिया है ।
प्रधानमन्त्री ओली द्वारा प्रस्तावित आश्वासन को अभी तक नेता नेपाल ने स्वीकार नहीं किया है । कहा जाता है कि नेता नेपाल खुद प्रधानमन्त्री बनने की खेल में लगे हैं । स्मरणीय है, नेकपा के भीतर सक्रिय तीन गुटों में से किसी के पास भी बहुमत नहीं है । अगर उनमें से कोई भी दो गुट एक जगह आ जाते हैं तो वही समूह पार्टी के अन्दर बहुमत पोजिसन में दिखाई देते है । आज प्रचण्ड–नेपाल समूह एक दिखाई दे रहे हैं, जिससे ओली समूह पार्टी में अल्पमत में हैं । अगर प्रचण्ड–नेपाल चाहते हैं तो ओली को पार्टी अध्यक्ष और प्रधानमन्त्री दोनों पद से हटा सकते हैं । इसीलिए ओली समूह पिछली बार नेपाल समूह को अपने पक्ष में लाकर पोजिसन कायम करने की कोशिश में हैं । ओली ने नेता नेपाल से कहा है कि पूर्व एमाले समूह को इकठ्ठा होना जरुरी है । उनका यह भी मानना है कि अगर माओवादी समूह पार्टी में हाबी हो जाएंगे तो नेकपा की भविष्य नहीं रहेगी ।
इधर नेपाल समूह को अपने पक्ष में लाने के लिए पार्टी अध्यक्ष तथा पूर्व माओवादी नेता प्रचण्ड भी क्रियाशील हैं । इसीलिए उन्होंने नेता नेपाल को प्रधानमन्त्री अफर किया है । अब देखना यह है कि इसतरह की त्रिकोणीय राजनीतिक दाँवपेंज में किसका पलडा भारी होता है, वही नेकपा की भावी दिशा तय करेगी ।

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