Tue. Jul 7th, 2020
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हर साया मौत का डराता है, हर सपना जीने को उकसाता है : बसन्त चौधरी

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आखिरी साँस तक

बसंत चौधरी

हम भागते हैं
जिन्दगी के पीछे–पीछे
और मौत चलती है दबे पाँव
हमारे पीछे–पीछे
आखिरी साँस तक
एक–एक साँस की बोली लगती है
कभी बेचते
कभी खरीदते हैं
हर साया मौत का डराता है
हर सपना जीने को उकसाता है
उफ !
ये मुँहजोर ख्वाहिशें जीने की
उफ ! यह मजबूरी आँसू पीने की
फिर भी
जिन्दगी के दीए हम
एक उम्मीद पर जलाते हैं
मौत से आँखमिचौली खेलते हैं
आखिरी साँस तक ।

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