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शक्ति तुझे अपार मिले : अलका सोनी

शक्ति तुझे अपार मिले

दु:ख-दर्द होते हैं क्या
तू इससे सदा अनजान रहे
जिस पथ पर तेरे कदम पड़े
बस खुशियों के त्यौहार मिले
जितने पतझड़ हैं मौसम के
आँचल में मेरे आन गिरे
तुझको हर पल जीवन में
महकती हुई बहार मिले
उदासी तुझको छू न पाए
फूलों सी हंसी पहचान बने
सफल बने हर मोड़ पर तू
जीत का हरदम ‘हार’ मिले
काट सके हर विपदा को तू
ऐसी विरांगना अवतार बने
हार मान ले शत्रु स्वयं ही
मां दुर्गा की तुझे तलवार मिले
निस्तेज कभी हो पाए न
ऐसी प्रखर पुंज- प्रकाश बने
निर्बल को भी बल दे पाओ
इतनी शक्ति तुझे अपार मिले
सोने-चांदी ,हीरे -मोती से
बनते हैं इस जग के गहने
अनमोल हो जो इनसे भी
जीवन में वो उपहार मिले।
अलका ‘सोनी’
लेखिका व कवयित्री

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