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चीन की मिलिट्री यूनिवर्सिटी के अनुसार चीन में 230 शहरों में कोरोना के करीब साढ़े छह लाख मरीज़

 

पूरी दुनिया हैरान थी. हैरान थी इस बात पे कि आखिर कोरोना को पैदा करने वाला चीन इसके चंगुल से इतनी जल्दी आज़ाद कैसे हो गया? क्यों चीन में कोरोना के मामले 80 से 85 हजार के बीच आकर अचानक रुक गए. मगर अब चीन के अंदर से ही आए एक आंकड़े ने चीन की पोल खोलकर रख दी है. चीन की मिलिट्री यूनिवर्सिटी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक चीन के 230 शहरों में कोरोना के करीब साढ़े छह लाख मरीज़ हैं. यानी चीन अब तक साढ़े पांच लाख लोगों का सच छुपा रहा था.

चीन सच्चा है या झूठा है. इस बहस में जाने से पहले आप आंकड़ों को देखिए. ये चीन में कोरोना वायरस के मामलों का चार्ट है. 22 जनवरी से इस चार्ट की शुरुआत होती है. तब यहां कोरोना के करीब साढ़े 5 सौ मामले थे. इसके बाद 1 मार्च तक ये आंकड़ा 80 हज़ार तक पहुंच जाता है. यानी अगले 40 दिन में 75 हज़ार नए मामले जुड़ जाते हैं. हर दिन के हिसाब से करीब 2 हज़ार मामले. अब यहां तक तो सब ठीक था. शक इसके आगे होना शुरू होता है.

चीन में 1 मार्च तक जो आंकड़ा 80 हज़ार था, वो बीस मई तक 83 हज़ार ही हो पाया. यानी आखिरी के इन 80 दिनों में चीन में कोरोना के सिर्फ तीन हजार मामले ही बढ़े. मतलब औसतन हर रोज़ जो मामले 22 जनवरी से 1 मार्च तक 2 हज़ार के हिसाब से बढ़ रहे थे. उनकी गिनती अचानक औसतन प्रति दिन महज़ 35 मामलों पर आकर ही अटक गई. क्या सच में यही सच था या फिर सच्चाई कुछ और है. तो सुनिए चीन के अंदर से ही अब जो नया खुलासा हुआ है उसने कोरोना के मरीजों की गिनती को लेकर चीन की झूठ को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है.

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जो चीन दुनिया को अपने यहां कोरोना के कंट्रोल होने का आंकड़ा दिखा रही थी. उन्हीं आंकड़ों को चीन की अपनी मिलिट्री यूनिवर्सिटी ने गलत ठहरा दिया है. और जो आंकड़े अब सामने आए हैं, वो चौंकाने वाले हैं. चीनी मिलिट्री यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के मुताबिक चीन के करीब 230 शहरों में कोरोना फैल चुका है. इतना ही नहीं चीन में कोरोना के मरीजों की तादद भी साढे 6 लाख पार कर चुकी है.

ये आंकड़े अहम इसलिए है क्योंकि ये किसी विदेशी या बाहरी एजेंसी का डेटा नहीं है. बल्कि ये चीन की ही अपनी मिलिट्री यूनिवर्सिटी से निकला है. तो फिर सवाल ये है कि अगर चीन में कोरोना कहर मचा रहा था और साढ़े 6 लाख लोग इसकी जद में आ चुके थे. तो चीन ने इन आंकड़ों को छुपाया क्यों. क्यों उसने दुनिया से कोरोना की असली तस्वीर छुपाई. चीन के असली आंकड़ों का जानना दुनिया के लिए ज़रूरी इसलिए भी है या था क्योंकि उसके सामने आने से इसकी वैक्सीन बनाने और इसके इलाज में जो वक्त लग रहा है उसे कम किया जा सकता है.

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अगर दुनिया भर में कोरोना के आंकड़ों को देखें तो भारत अभी 11वें नंबर पर है. जबकि चीन 13वें नंबर पर. भारत में कोरोना के मामले सवा लाख के करीब पहुंच रहे हैं. जबकि करीब ढाई महीने से चीन के आंकड़े 80 और 85 हज़ार के दरमियान ही हैं. इसकी सिर्फ दो ही वजह हो सकती हैं. पहली या तो चीन ने कोरोना पर काबू पा लिया. दूसरी या तो वो असली आंकड़ों को छुपा रहा है. ज़ाहिर है कोरोना की वैक्सीन तो अभी बनीं नहीं. और अगर लॉकडाउन से कोरोना के मामले काबू में आने होते. तो पूरी दुनिया में ये मामले क्यों नहीं रुके. सिर्फ चीन में ही क्यों रुके?

चीन के अंदर क्या हो रहा है. इसकी जानकारी बाहर तक आना उतना ही मुश्किल है. जितना किम जोंग उन के देश में एंट्री लेना. दुनिया को सिर्फ उतना ही पता चलता है जितना चीन बताना चाहता है. इसलिए चीन के ये आंकड़े शक़ पैदा करते हैं. मगर अब चीन की ही नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नॉलजी यानी एनयूडीटी के आंकड़ों ने उसके झूठ का पर्दाफाश कर दिया है. कहा जाता है कि चीन में सबसे विश्वसनीय आंकड़े नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नॉलजी के पास ही होते हैं. जिसके ऊपर दुनिया भरोसा कर सकती है.

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अब सवाल ये है कि अगर चीन अपने यहां कोरोना के मामलों को छुपा भी रहा है तो उससे दुनिया को क्या लेना देना ये उनकी समस्या है. दरअसल, मामला ये है कि अगर चीन में कोरोना वायरस के असली मामलों का पता चलता तो ये जानकारी बाकी देशों की सरकारों के लिए, डॉक्टरों के लिए और वैज्ञानिकों के लिए कारगर साबित हो सकती थी. क्योंकि ये आंकड़े उन्हें आगे की रणनीति बनाने में मदद करते. चूंकि ये वायरस चीन से ही निकला था. इसलिए इससे ये पता चल पाता कि कैसे ये वायरस लोगों पर असर करता है. कितने लोगों को संक्रमित कर सकता है. क्योंकि अभी भी इसका संक्रमण कई देशों में बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है.

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