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साफ किया ना गर दिल तो, गंगा में नहाय तो क्या हुआ :कमला भंसाली जैन

साफ किया ना गर दिल तो….
(गजल)

साफ किया ना गर दिल तो,
गंगा में नहाय तो क्या हुआ।
पापों में मनवा घूम रहा,
माला फिराये तो क्या हुआ।
आगम, गीता, रामायण को,
दिन-रात तू पढ़ता रहता है।
अमल किया ना उन पर तो-
गर्दन हिलाए तो क्या हुआ।
साफ क्या ना गर दिल तो…
मुख से राम -राम भजता,
पर मन में हेरा-फेरी है ।
जाकर मंदिर -तीर्थों में,
शीश झुकाए तो क्या हुआ।
साफ क्या ना कर दिल तो….
A.B.C.D में फूल रहा ,
क ,ख, ग, को भूल गया ।
आदर में हाथ जुड़े नहीं,
फिर हाथ मिलाए तो क्या हुआ।
साफ क्या ना गर दिल तो….
झूठी माया के खातिर,
तू पाप बटोरता रहता है।
दीन- दुःखी का हाल ना पूछा,
तो ब्राह्मण जीमाने से क्या हुआ।
साफ क्या ना गर दिल तो…
जीवित मां बाप की सेवा कर क्या?
अपना फर्ज निभाया है,
‘कमला ‘मरने के बाद अस्थियां,
हरिद्वार में (ले जाए) घूमाय तो क्या हुआ।
‘अनेकांत ‘को समझा नहीं ,
हम-जैन कहलाय तो क्या हुआ।
साफ किया ना गर दिल को तो…।

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कमला भंसाली
(राजविराज)

राा

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