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डब्ल्यूएचओ के साथ अमेरिका ने समाप्त किए सम्बन्ध

 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (29 मई) को कहा कि उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ अमेरिका के सारे संबंधों को खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ कोरोना वायरस को आरंभिक स्तर पर रोकने में नाकाम साबित हुआ है। संयुक्त राष्ट्र एजेंसी पर वैश्विक महामारी का केंद्र रहे चीन की ‘कठपुतली’ का आरोप लगाते हुए ट्रंप ने इसकी फंडिंग पहले ही बंद कर दी थी।

ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “क्योंकि वे अनुरोध और बहुत अहम सुधार करने में नाकाम रहे हैं, हम आज विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ अपने संबंधों को समाप्त करने जा रहे हैं।” रिपब्लिकन नेता ने कहा कि डब्ल्यूएचओ को दिए जाने वाले फंड को दूसरे देशों और आपात स्थिति में वैश्विक जन स्वास्थ्य सेवाओं में आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जाएगा।

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इसके साथ ही डोनाल्ड ट्रंप ने चीन पर भी निशाना साधा। उन्होंने साफ-साफ शब्दों में चीन से कहा कि उसे कोरोना वायरस के मामले में दुनिया के सवालों के जवाब देने होंगे। दरअसल, ट्रंप ने दुनिया भर में कोरोना वायरस के प्रसार के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया है और उस पर अक्षमता का आरोप भी लगाया है। कोरोना वायरस पिछले साल दिसंबर में सबसे पहले चीन के वुहान में सामने आया था। यह वायरस 3 लाख 62 हजार से ज्यादा लोगों की जान ले चुका है और करीब 58 लाख से अधिक लोगों को संक्रमित कर चुका है।

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ट्रंप ने 14 अप्रैल को डब्ल्यूएचओ को सालाना दी जाने वाली 50 करोड़ डॉलर तक की सहायता रोक दी थी। उन्होंने डब्ल्यूएचओ पर आरोप लगाया है कि वुहान में पहली बार सामने आने के बाद कोरोना वायरस के प्रसार के उसके प्रबंधन में खामी है और उसके कथित कुप्रबंध और कथित रूप से उसे ढकने में ”संगठन” की भूमिका का पता लगाने के लिए समीक्षा की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को आगाह किया था कि वह अगले 30 दिन में यह प्रदर्शित करे कि वह चीन से प्रभावित नहीं हैं। ऐसा नहीं करने पर ट्रंप ने इस संगठन में अमेरिका की सदस्यता के बारे में पुनः विचार करने और संगठन को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को “स्थायी रुप” से रोक दी जाएगी।

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