परिवर्तन तो नियम है : रंजू गुप्ता
परिवर्तन तो नियम है ।
पर यह कैसा है परिवर्तन ?
जाने कैसी महामारी फैली
कर गई कैद घरो में सबको
सारा विश्व मौन हो गया
शिथिल बेजान मानव हो गए
चारो ओर सन्नाटा छा गया
मानव डर के घर में बैठ गए
परिवर्तन तो सुना था
पर यह कैसा है परिवर्तन ?
आज कुदरत भी मना रहा उत्सव
चारो और फैली वसंत की हरियाली
मुस्कुरा रहे है प्रत्येक पुष्प ऐसे
मानव की दुर्दशा पर जैसे
प्रकृति से खिलवाड करना
महंगा पड सकता है मानव
उसी का परिणाम हैं शायद
भुगत रहे है मानव
परिवर्तन तो सुना था
पर यह कैसा है परिवर्तन ?
काले मेघो से भरा गगन
गरजनाद करते बादल
दामिनी भी चुप कहाँ है बैठी
मानव की इस विवशता पर
मानो वो भी हँस रहे हमपर
परिवर्तन तो सुना था
पर यह कैसा है परिवर्तन ?



