Sat. Jul 11th, 2020

निर्जला एकादशी पर गरीबों और जरूरतमंदों को करें दान, एवं ऐसे करें पूजा : आचार्य राधाकान्त शास्त्री

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निर्जला एकादशी पर गरीबों और जरूरतमंदों को करें दान, एवं ऐसे करें पूजा, आचार्य राधाकान्त शास्त्री

कल देशभर में निर्जला एकादशी मनाई जा रही है. ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी निर्जला एकादशी पर किया गया व्रत, अनुष्ठान अत्यंत फलदायी है। इस दिन किए गए पूजन व दान-पुण्य से अक्षय पुण्य की प्रप्ति होती है. अगर आप साल की 24 एकादशी का व्रत नहीं पाते तो इस एक व्रत को करने मात्र से ही आप सारा पुण्य कमा सकते हैं। यह व्रत बिना पानी के रखा जाता है इसलिए इसे निर्जला एकादशी कहते हैं.
निर्जला एकादशी पर गरीबों व जरूरतमंदों को दान करें
इस दिन किए गए पूजन व दान-पुण्य से अक्षय पुण्य की प्रप्ति होती है। निर्जला एकादशी पर गरीबों व जरूरतमंदों को दान देने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। निर्जला एकादशी के दिन अन्न, वस्त्र, गौ, जल, शैय्या, सुन्दर आसन छाता और पंखा आदि का का दान करना चाहिए। जो इस दिन गरीब, जरूरतमंद एवं सुपात्र ब्राह्मण को आवश्यक सामग्री , बर्तन, एवं जूता दान करता है उसे स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यता
एक बार भीम ने व्यासजी से निवेदन किया कि मुझसे कोई व्रत नहीं किया जाता, इसलिए मुझे ऐसा उपाय बताएं जिसके प्रभाव से सद्गति प्राप्त हो जाए. तब व्यासजी ने कहा कि वर्षभर की सम्पूर्ण एकादशी का व्रत नहीं हो सकता तो केवल एक निर्जला कर लो, इससे सालभर की एकादशी के समान फल प्राप्त हो जाएगा। भीम ने ऐसा ही किया. इसलिए इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी नाम से भी जाना जाता है.
निर्जला एकादशी की पूजा विधि
निर्जला एकादशी के दौरान भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। सुबह व्रत की शुरुआत पवित्र नदियों में स्नान करके किया जाता है. अगर नदी में स्नान ना कर पाएं तो घर पर ही नहाने के बाद ‘ॐ नमो वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। भगवान विष्णु की पूजा करते समय उन्हें लाल व पीले फूलों की माला चढ़ाएं, धूप, दीप, नैवेद्य, फल अर्पित करके उनकी आरती करें।
24 घंटे बिना अन्न-जल व्रत रखें और अगले दिन सुबह 6 बजे विष्णु जी की पूजा कर व्रत का पारण करें इस व्रत के दौरान गरीबों , असहायों एवं जरूरतमंदों , एएवं ब्राह्मणों को उसके उपयोग की सामग्री का दान-दक्षिणा देना शुभ माना जाता है। व्रत राज एकादशी के प्रभाव से सबको दैविक शक्ति व दैविक कृपा प्राप्त हो, आचार्य राधाकान्त शास्त्री ।

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