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राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री को स्वागत करने के लिए हर देश में राजदूतावास आवश्यक नहीं हैः गिरी

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काठमांडू, ७ जून । प्रमुख प्रतिपक्षी दल के साथ आबद्ध सांसद् प्रदीप गिरी का कहना है कि नेपाल आर्थिक रुप में कमजोर देश हैं, जिसको हर राष्ट्र में राजदूतावास रखने की कोई भी जरुरत नहीं है । उन्होंने कहा है कि भारत, चीन और अमेरिका में राजदूतावास आवश्यक है, अन्य देश में नहीं है । विभिन्न मन्त्रालयों के लिए विनियोजित बजट संबंधी विषयों में आइतबार संसद् में बोलते हुए उन्होंने प्रस्ताव किया है कि अन्य देशों में रहे राजदूतावास को हटाकर खर्च में कटौती की जाए ।
संसद् में बोलते हुए सांसद् गिरी ने कहा– ‘हम लोगों को पसन्द आए या नहीं आए, हमारे लिए आवश्यक देश सिर्फ भारत, चीन और अमेरिका है । जिस वक्त राजाओं को हर सयर में दरबार की आवश्यकता होती थी, बांकी अन्य देश वैसा ही है, जहां राष्ट्रपति और प्रधानमन्त्री को स्वागत करने के लिए राजदूतावास रखने की आवश्यकता नहीं है ।’ उनका कहना है कि बांकी देशों में कार्यकर्ताओं को भर्ती करने के लिए राजदूतावास रखा गया है ।
इसीतरह सांसद् गिरी ने कहा है कि राजा महेन्द्र की तरह कथनी और करणी अलग–अलग नहीं होना चाहिए । उनक कहना है कि परराष्ट्र नीति, विदेश नीति तथा भारत के साथ रहे संबंध में राजा महेन्द्र चिठ्ठी में जो लिखते थे, भाषण उसका विपरित होता था । नेपाल द्वारा जारी नयां नक्सा, नेपाल–भारत सीमा विवाद आदि विषयों में चर्चा करते हुए उन्होंने ऐसा कहा है ।

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