प्यार करने के लिए मौसम सुहाना चाहिए : कवि दिनेश सिंह सेंगर
इन परिंदों के लिए कोई ठिकाना चाहिए।
हो कहीं पर भी मगर एक आशियाना चाहिए।।
आज भ्रष्टाचार में ही जल रहे सबके कफ़न।
अब तो मिल कर घूसखोरी को मिटाना चाहिए।।
अब बगावत ही यहां पर बन गया मकसद मेरा।
जो मिले तो घर मिले न क़ैदखाना चाहिए।।
अब क़दम दर क़दम शायद जंग लड़ना ही पड़े।
आज यह तय हो गया हर जंग लड़ना चाहिए।।
सबके दिल में एक हवा बदलाव की बहने लगी।
मेरी कोशिश है कि एक तूफ़ान उठना चाहिए।।
या उड़ चलो अब इस चमन से ये फिज़ा अच्छी नहीं।
प्यार करने के लिए मौसम सुहाना चाहिए।।

अम्बाह मुरैना मध्यप्रदेश, भारत


