विश्व हिन्दू महासंघ द्वारा नेपाल भारत रिश्तों को साैहाद्रपूर्ण बनाने का आग्रह
काठमान्डू २० जून
विश्वहिन्दु महासंघ ने नेपाल भारत के बीच बढते तनाव के मद्देनजर प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दोनों देशों के बीच रिश्तों को साैहाद्रपूर्ण बनाने का आग्रह किया है । मिति :- २०७७/०३/०६ गते शनिबार जारी किए गए प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि परापूर्वकाल से ही स्वतन्त्र हमारे मातृभूमि राष्ट्र नेपाल में कभी भी विदेशी झण्डा नही फहराया गया यह तथ्य सर्वविदित है । नेपाल अधिराज्य के एकीकरण से ही अपने निकटतम् पडोसी तथा दूर के मित्र राष्ट्र से समेत हम हमेसा सन्तुलित कूटनीति अपनाते आ रहे हैं । सीमा जुडे हए राष्ट्र के बीच सीमा विवाद होना स्वभाविक है । सीमा विवाद को अनावश्यक रूप से व्याख्या कर उससे सम्बन्धित मित्र राष्ट्र पर आँच आनेबाले अभिव्यक्ति से हमारी धर्म, संस्कृति, प्रथा, परम्परा और आर्थिक, सामाजिक, मूल्यमान्यता, रीतिरिवाज, जीवनशैली धार्मिक तथा आध्यात्मिक एकता में समेत खलल एवं नकारात्मक असर दिखने की सम्भावना है इसके मध्यनजर इस तरह के विवाद को कुटनीतिक तरीका से ही पार लगाने के लिए नेपाल और भारत दोनो को तैयार होना चाहिए । समय–समय में नेपाल के राजनीतिक नेतृत्व वर्ग द्वारा किए गए सन्धि, सम्झौता, सद्भाव और मित्रता कि ख्याल करते हुए पशुपतिनाथ से गोरखनाथ, विश्वनाथ होतेहुए तिरुपती तक और डोलेश्वर–केदारनाथ, लुम्बिनी– बोधगया, जनकपुर – अयोध्या तककि तथा शंकराचार्य कि चारों मठों को नेपाल और भारत से संसार भरका ॐकार परिवारको अविछिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक एकता रहा है । अतः ऐसा आत्मिक भावनात्मक एवं प्रगाढ सम्बन्ध को अक्षुण्ण रखने के कार्य मे भारत को वार्ता के सहज माध्यम से आगे बढ्ना और बढाने के लिए उपयुक्त समय और परिस्थिति का निर्माण करना चाहिए ऐसा हमारा मानना है । हाल लिम्पियाधुरा, लिपुलेक और कालापानी सीमा विवाद के कारण नेपाल–भारत पारस्परिक सम्बन्ध एवं धार्मिक आध्यात्मिक एकता में आँच नआने देने के लिए दोनो सरकार (नेपाल-भारत) के बीच समझदारी कायम कर समन्वायात्मक रूप मे भूमिका निर्वाह कर आगे बढ्ने के लिए अनुरोध करते हैं ।


