Thu. Aug 6th, 2020

आज दिन के 10:30 से दोपहर 02:04 तक लगने वाले सूर्यग्रहण के मध्य निम्न बातों का रखें विशेष ध्यान

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राधाकान्त शास्त्री, आज दिन के 10:30 से दोपहर 02:04 तक लगने वाले सूर्यग्रहण के मध्य निम्न बातों 👇का रखें विशेष ध्यान :-

1. ग्रहण के समय किसी भी प्रकार के खाद्य पदार्थ का सेवन न करें।
जबकि ग्रहण का यह नियम बच्चों, बीमार लोगों और बुजुर्गों पर लागू नहीं होता। वे आवश्यकतानुसार भोजन एवं औषधि सेवन कर सकते हैं।

2.ग्रहण काल के समय किसी भी तरह का नया काम या शुभ कार्य करने या उसके तैयारी से परहेज करना चाहिए। घर मकान का निर्माण, वाहन की खरीदारी या शादी-विवाह की तैयारियों के बारे में ना सोचें।

3. ग्रहण काल में नुकीली चीजों का प्रयोग करना अशुभ माना जाता है. अर्थात कैंची, चाकू, कांटा या सुई जैसी धारदार और नुकीली चीजों के प्रयोग करने से बचें।

4. सूतक लगने के बाद मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं, ग्रहण काल मे स्नान, देव दर्शन, स्पर्श, और मूर्तियों, फोटों के पूजा-पाठ नहीं करनी चाहिए और भगवान की मूर्तियों को हाथ से स्पर्श भी नहीं करना चाहिए।

5. ग्रहण का सूतक काल लगने के बाद प्रकृति ज्यादा संवेदनशील हो जाती है. यही कारण है कि इस समय पेड़, पौधों और पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए। हालांकि तुलसी के पत्तों को पहले ही तोड़कर रख लें और पानी में भीगने दें। सूतक लगने के बाद यदि किसी को खाना परोसें भी तो उसमें तुलसी का पत्ता जरूर डालें।

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6. ग्रहण काल मे बालों पर कंघी करना, दांतून करना या नाखून काटना भी अशुभ माना जाता है. इसलिए ग्रहण के समय ऐसा कोई काम ना करें।

7. ग्रहण काल मे सबको भगवान का ध्यान, मंत्र जप, पाठ, एवं हवन करना चाहिए, करना चाहिए इससे नकारात्मकता का आप पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता. इस समय आप धार्मिक पुस्तकों का भी अध्ययन कर सकते हैं।

8. गर्भवती महिलाओं को ग्रहण की घटना को देखने से भी बचना चाहिए. हो सके तो ग्रहण के दौरान घर से बाहर न निकलें. अगर आप ग्रहण देखती हैं तो गर्भ में पल रहे बच्चे को शारीरिक या मानसिक परेशानियां हो सकती हैं।अतः आप सब रामायण का पाठ करें,

9. धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण का सूतक लगने के बाद किसी गरीब या असहाय व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए, अपने वाणी का तापमान बिल्कुल नीचा रखें, किसी से भी ऊंची आवाज में बात न करें, खास कर पति, पत्नी, बच्चों, माता, पिता, भाई- बहन, एवं पड़ोसियों से प्रेमात्मक भाव बनाएं, इनकी सहायता करें, अन्यथा मानसिक तनाव से करने से आप पाप के ज्यादा भागीदार बनते हैं।

10. ग्रहण काल में बाद गर्भवती महिलाएं ग्रहण खत्म होने तक धातुओं से निर्मित वस्तुओं को न पहनें और न ही उनका प्रयोग करें।

11. इस दौरान गर्भवती महिलाओं को खाना नही बनाना चाहिए एवं खाने में छोंक या तड़का भी नहीं लगाना चाहिए। खाने के विभाग से जितना परहेज रख सकें उतना बेहतर होगा।

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12. ग्रहण लगने के बाद मांस-मछली, तम्बाकू, शराब या सिगरेट आदि का सेवन करने की भी मनाही होती है । सूतक लगने के बाद से ही इसका सख्त परहेज करना चाहिए।

महादेव के कृपा से इस सूर्यग्रहण से सबके सभी नकारात्मक सोंच एवं राक्षसी, तामसी शक्तियां समाप्त हो, एवं सबके हृदय में प्रेम, सत्य, सद्भाव, साहसिक, प्रगतिशील, आध्यात्मिक, दैविक, एवं वैज्ञानिक शक्तियों का जन्म एवं सबलता पूर्वक विस्तार हो, सबसे प्यार हो, सबमे नई ऊर्जा, नई सोंच व नई दिशा से लक्ष्य प्राप्त हो, आचार्य

ग्रहण में राशि के अनुसार दान :-
आराकाशा के अध्ययन ग्रंथों के अनुसार इस ग्रहण का विभिन्न राशियों पर शुभ या अशुभ प्रभाव पड़ेगा । इस ग्रहण को मिथुन राशि मे में लगने से मिथुन राशि वालों के लिए विशेष कष्टदायी हो सकता है । साथ ही वृषभ, कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ व मीन राशि वालों के लिए नुकसानदेह हो सकता है । जबकि यह ग्रहण मेष, मकर कन्या व सिंह राशि वालों के लिए शुभफल देने वाला होगा। अपनी राशि के अनुसार दान, इष्ट उपासना, जप, पाठ, एवं हवन इसके अशुभ प्रभाव को कम करने में पूर्ण पर्याप्त है ।

मेष- सप्तधान्य
चावल,गेंहूँ,तिल, चना, जौ, मूंग, उरद, का दान करें,

वृषभ- चीनी, रसगुल्ला, मिठाई दान करें।

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मिथुन- हरा शब्जी, एवं मूंग की दाल दान करें।

कर्क- चावल, चीनी, दूध का दान व पक्षियों को दाना डाले।

सिंह- तांबा, बिजली उपकरण, एवं गुड़ का दान करें।

कन्या- भिंडी, परवल, एवं हरे कपड़े दान करें।

तुला- चावल, चीनी, दही, दूध, कपूर, इत्र, का दान करें।

वृश्चिक- मिठ्ठा , गेंहूँ, मसूर की दाल दान करनी चाहिए

धनु- गुड़ , हल्दी, पीला सरसो व पीले वस्त्र दान करें।

मकर- लोहा के उपकरण, सरसो का तेल दान करना चाहिए

कुंभ- तिल, लोहा, उड़द की दाल दान करनी चाहिए

मीन- हल्दी, पीला सरसो, गुड़ का दान करें।

नोट :-
ग्रहण के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए – गायत्री मंत्र, महामृत्युजंय मंत्र, सूर्य मंत्र, राहु मंत्र, का जप करें। साथ ही सूर्य नमस्कार, आदित्य हृदय स्तोत्र , रामरक्षा स्तोत्र, गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का पाठ, गुरु मंत्र का जप एवं भजन-कीर्तन करना चाहिए।
जबकि गर्भवती स्त्रियां ग्रहण के पहले स्नान कर एक कपड़े में तुलसी पत्र, कुश, और गाय का गोबर बांध कर पेट पर बांध लें, और अपने बराबर काला एवं लाल धागा लेकर उसके दोनों सिराओं ओर 1 – 1 कांटी बांध कर एक सिरे को किसी पुरुष से दीवाल में गड़वा दें, और सोएं नही, जागते हुवे, जप, पाठ, करते रहें,

आचार्य राधाकान्त शास्त्री,ब्रह्म वाणी यज्ञ ज्योतिष आश्रम कालीबाग बेतिया, संपर्क – 9934428775

।। शुभम् भूयात् ।।
आचार्य राधाकांत शास्त्री।

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