Thu. Aug 6th, 2020

चीन’ और उसकी विस्तारवादी नीति : प्रियंका पेड़ीवाल अग्रवाल

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प्रियंका पेड़ीवाल अग्रवाल, बिराटनगर |’चीन ‘ अर्थात ‘ चाइना’ एक एेसा शब्द जो किसी भी परिचय का मोहताज नहीं है। ‘ ड्रेगन’ के नामवाली से भी जाना जाने वाला ये देश आज अपने सस्ते सामानों के दम पर विश्वभर के लगभग हर देश में अपनी घुसपेढ रखता है, और आज इसी वजह से विश्वभर के ज्यादातर देश आज इसके कच्चे सामानों पर निर्भर करते हैं। चाहे विश्वभर में कितनी भी बड़ी कोई भी कंपनी क्युं ना हो उनके प्रोडक्स का कोई ना कोई हिस्सा चीन से ही आयात किया जाता है, जिस वजह से चीन ने आज विश्वभर के देशों को अपने उपर इस तरह से निर्भर बना दिया है जैसे कि वो कोई ‘ Economic Prisoner’ हो।अब इन देशों का कच्चा सामान के लिये आत्मनिर्भर बनना एक तरह से नामुमकिन हो गया है, जिसका चीन अब अपने चौतरफे फायदे के लिये मनमाने ढंग से उपयोग कर रहा है।
आज हम जिस चीन को जानते हैं उसका वास्तविक स्वरुप दरअसल ऐसा नहीं था। वर्तमान चीन की जो हम भौगोलिक परिपेक्क्ष देखते हैं उसमें आपको विश्वास नही होगा लेकिन ये सच है कि उसका ६०% हिस्सा दूसरे देशों का है , जिसपर चीन ने अपनी विस्तारवादी नीति के तहत धीरे -धीरे करके कहीं आंशिक तो कहां पूर्ण रुप मे अपना कब्जा स्थापित कर वहाँ के वासिंदों को गुलाम बनाकर उन्हें और उनके देश को जबरन अपने देश मे शामिल कर लिया है। ये खेल जो आज चीन खेल रहा है ये आज का नहीं बल्कि
वर्षों पुराना है जिसमें चीन ने नजाने कितने देशों को कहीं जबरन तो कहीं आर्थिक मदद के नाम पर अपने चक्रव्युह में फसाकर अपने घुटने उसके आगे टेकने पर मजबूर किया और साथ ही उन देशों के नागरिकों का जबरन शोषण कर मनमाने ढंग से आज भी उनपर राज कर रहा है।तिब्बत, हॉन्ग कॉन्ग, मन्चुक्यु पर पुर्णत: कब्जा,नार्थ और साउथ कोरिया,
ताहिवान, भारत, वियतनाम के कुछ भूभाग पर कब्जा चीन के इसी विस्तारवादी नीति का परिणाम है।
ऐसा नहीं की समय के साथ चीन बदल गया , ची न आज भा अपने इसी नीति पर कायम है जिसका जीता जागता सबूत है चीन के अपने पड़ोसियों के साथ तलख होते रिश्ते। चीन अपने चौदह पड़ोसी देशों के साथ सीमा साझा करता है और उसका चौदह देशों के साथ सीमा विवाद है साथ ही नौ अन्य देश हैं जिनके साथ चीन का भूभाग को लेकर विवाद चल रहा है और चीन जानबूझकर इस विवाद को सुलझाना भी नहीं चाहता क्युंकि ऐसा करने के बाद चीन के लिये विस्तारवाद की कोई वजह और जगह दोनो ही नहीं रह जाएगी। ऐसा ही एक घटनाक्रम अभी अंतराष्ट्रीय मंच पर काफी सुर्खियों में है जिसका नाम है गलवान भैली । यहां चीन और भारत के बीच मे १८ जून को सीमा विवाद को लेकर हुए हिंसक झरप में दोनों ही तरफ के काफी सैनिक मारे गये जहां भारत मे अपने २० जवान मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि की है वहीं चीन की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है पर सुत्रों की माने तो चीन के भी ३५-४३ सैनिक मारे जाने का अंदेशा है और अभी दोनों देश की बीच का परिस्थति काफी तनाव ग्रस्त है। दोनो ही तरफ से सैनिकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और दोनो तरफ के सैनिक अपने पूरे लाभोलष्कर के साथ अपना मिलिट्री सेटअप वहाँ पर तैयार कर रही हैं।
हालाँकि ४५ साल में पहली बार भारत- चीन सीमा पर खून बहा है लेकिन चीन पहले भी मौका देखकर भारतिय सीमा में बार-बार घुसपैठ करता रहा है और भारतिय क्षेत्र को अुना बताता रहा है
जिसपर कई बार दोनो तरफ के सैनिक आमने सामने हुए है। आज अक्साई चीन के नाम से जाने जाना वाला हिस्सा जिसका क्षेत्रफल ३७२४४ वर्गकिलोमीटर है पूर्णरुप से भारत का है जिसपर चीन ने जबरन कब्जा कर रखा है।चीम की इन्हीं चालबाजियों और नीतियों ने चीन को आज विश्व पटल पर दूसरे देशों से अलग थलग कर दिया है और चीन को एक मौकापरस्त और विश्वासघाती देश के रुप में चिनहित किया है और साथ ही साथ तीसरे विश्व युद्ध की आहट तो नहीं इसकी आशंका भी पैदा कर रहा है।

प्रियंका पेड़ीवाल अग्रवाल, बिराटनगर ।

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